
राजू कुमार सिंह के 2018 celebratory firing मामले में दोषसिद्धि, चार साल की सजा और हाईकोर्ट की कार्यवाही के बाद विधानसभा सदस्यता को लेकर कानूनी स्थिति जानिए।
नई दिल्ली/मुजफ्फरपुर: बिहार के साहेबगंज से भाजपा विधायक राजू कुमार सिंह से जुड़े 2018 के चर्चित हर्ष फायरिंग मामले में उनकी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है।दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली की विशेष एमपी-एमएलए अदालत द्वारा दी गई सजा को बरकरार रखते हुए दोषी करार होने के फैसले पर तत्काल रोक से इनकार कर दिया है। इसके बाद विधानसभा सदस्यता पर कानूनी संकट या यूं कहे कि विधायकी भी जा सकती है।
चार साल की सजा और 25 लाख रुपये मुआवजा
दरअसल 2018 के हर्ष फायरिंग के मौत के मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने जुलाई 2026 में राजू कुमार सिंह को चार साल के कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने मृतका के पति को 25 लाख रुपये मुआवजा देने का भी निर्देश दिया। आर्म्स एक्ट के तहत अलग से दो महीने की सजा भी सुनाई गई थी। जिसको लेकर विधायक ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। लेकिन मंगलवार को कोर्ट ने मौत मामले में किसी तरह का कोई राहत नहीं दी है।
हाईकोर्ट ने की सजा निलंबित, दोषसिद्धि पर इनकार
दिल्ली हाईकोर्ट ने जुलाई 2026 में राजू कुमार सिंह की चार साल की सजा को निलंबित करते हुए उन्हें राहत दी थी। हालांकि, सजा का निलंबन और दोषसिद्धि पर रोक दो अलग कानूनी पहलू हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार अदालत ने दोषसिद्धि पर तत्काल रोक देने से इनकार कर दिया है।
इसका अर्थ यह है कि अपील लंबित रहने के दौरान उन्हें सजा के क्रियान्वयन से राहत मिल सकती है, लेकिन निचली अदालत की दोषसिद्धि अपने आप समाप्त नहीं होगी।
क्या था 2018 का मामला?
मामला 31 दिसंबर 2018 की रात दक्षिण दिल्ली के फतेहपुर बेरी स्थित एक फार्महाउस में आयोजित न्यू ईयर पार्टी से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार पार्टी के दौरान हुई फायरिंग में आर्किटेक्ट अर्चना गुप्ता के सिर में गोली लगी थी। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां 3 जनवरी 2019 को उनकी मौत हो गई। जिसके बाद उनके पति ने थाने में मुकदमा दर्ज कराया था।
दिल्ली की विशेष अदालत ने अपने 6 जून 2026 के फैसले में राजू कुमार सिंह को IPC की धारा 304 पार्ट-II और आर्म्स एक्ट की धारा 30 के तहत दोषी ठहराया था।
विधानसभा सदस्यता पर क्या असर पड़ेगा?
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत किसी सांसद या विधायक को दो वर्ष या उससे अधिक की सजा मिलती है तो उसपर सदस्यता से संबंधित अयोग्यता के प्रावधान लागू हो सकते हैं। हालांकि, ऐसे मामलों में दोषसिद्धि पर न्यायिक रोक और अपील की स्थिति महत्वपूर्ण होती है।
इसलिए राजू कुमार सिंह की विधानसभा सदस्यता का अंतिम कानूनी परिणाम केवल सजा निलंबित होने से तय नहीं माना जा सकता। दोषसिद्धि पर अदालतों द्वारा दिए जाने वाले आदेश और संबंधित संवैधानिक प्राधिकरण की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
राजनीतिक तौर पर बढ़ा दबाव
दोषसिद्धि बरकरार रहने की स्थिति में इस मामले पर राजनीतिक प्रभाव भी दिखने लगा है। विपक्षी दल मसलन राजद ने राजू सिंह की तत्काल विधायकी बर्खास्त करने की मांग की है। हालांकि, सदस्यता समाप्त होने का अंतिम निष्कर्ष संबंधित कानूनी प्रक्रिया और सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के आधार पर ही होगा।










