

राजेन्द्र प्रसाद सिंह बोले- मीडिया को आजादी के समय की पत्रकारिता से सीखने की जरूरत
मुजफ्फरपुर: शहर के आमगोला स्थित शहनाई बैंक्वेट हॉल में रविवार को एएस फाउंडेशन के बैनर तले भारतीय मीडिया की भूमिका और निष्पक्षता पर विमर्श आयोजित किया गया। कार्यक्रम का विषय ‘भारतीय मीडिया : सच के कितने पास, तथ्य से कितने परे’ था। इसमें पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, विश्वसनीयता और पारंपरिक एवं वैकल्पिक मीडिया की भूमिका पर चर्चा हुई।
इतिहासकार एवं लेखक डॉ. राजेन्द्र प्रसाद सिंह ने कहा कि आजादी के बाद भारतीय मीडिया का स्वरूप समय के साथ बदला है। वर्तमान दौर में मीडिया की निष्पक्षता और निर्भीकता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में पत्रकारिता को आजादी के समय के अपने मूल्यों और आदर्शों से सीखने की जरूरत है।
लेखक एवं चिंतक डॉ. हरिनारायण ठाकुर ने कहा कि मीडिया को अपनी निष्पक्ष भूमिका और जिम्मेदारी नहीं भूलनी चाहिए। उन्होंने चिंता जताई कि पारंपरिक पत्रकारिता अपने मूल उद्देश्यों से दूर होती दिखाई दे रही है। उन्होंने ‘अप्पन समाचार’ के प्रयासों की सराहना की।



लेखक एवं संस्कृतिकर्मी अरुण नारायण ने बिहार में पत्रकारिता के इतिहास का उल्लेख करते हुए पारंपरिक और वैकल्पिक मीडिया की भूमिका पर विचार रखे।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में पारंपरिक एवं वैकल्पिक मीडिया विषय पर पैनल चर्चा आयोजित की गई।
इसमें साहू भूपाल भारती, डॉ. ज्ञान प्रकाश, डॉ. राजीव कुमार, अशोक भारती, राजा ठाकुर, अमृतांज इंदीवर और संतोष सारंग ने पत्रकारिता के विभिन्न पहलुओं पर अपनी बात रखी। इस दौरान श्रोताओं ने मीडिया की विश्वसनीयता और घटती साख से जुड़े सवाल भी उठाए। भूपाल भारती ने भी पत्रकारिता पर उत्पन्न विश्वनीयता के संकट को दुःखद बताया है।
इस अवसर पर कठपुतली कलाकार सुनील सरला ने कठपुतली शो के माध्यम से लोकतांत्रिक मीडिया की प्रवृत्तियों में आए बदलाव को प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुशांत कुमार और संतोष सारंग ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. हेम नारायण विश्वकर्मा ने किया।
कार्यक्रम में डॉ. रामेश्वर राय, डॉ. ललन भगत, डॉ. विष्णुदेव यादव, डॉ. अविनाश कुमार, सोनू सरकार, मदन प्रसाद, बैजू कुमार, फुलदेव पटेल, नीरज कुमार, अमरेंद्र कुमार, यशोदा कुमारी पासवान, डॉ. रिंकु कुमारी, अनीता कुमारी, सिमरन सहनी, मुन्ना कुमार, लालबाबू पटेल और राकेश रंजन सहित कई लोग उपस्थित रहे।










