लालू यादव की गद्दी खतरे में? परिवार के अंदर मचा घमासान

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क्या लालू प्रसाद यादव को राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष से हटाने की तैयारी चल रही है? लग तो यही रहा है। जिस तरह से रोहिणी आचार्य ने अपने पोस्ट में राजनीति छोड़ने की बात कही है वो बहुत कुछ बयान कर रही है।

बिहार विधानसभा चुनाव में राजद को मात्र 25 सीटों पर संतोष करना पड़ा। 143 सीटों पर राजद ने अपने उम्मीदवार उतरे थे। लेकिन महागठबंधन के आंतरिक राड़ ने राजद की पूरी लुटिया ही डुबो दी। अगर 1 सीट भी कम पर जाती तो विपक्ष का ओहदा भी नहीं मिलता।

कभी बिहार का मतलब राजद और राजद का मतलब बिहार हुआ करता था। समोसे में भी जिस तरह से आलू की जगह अलग अलग स्वाद डालने के लिए प्रयोग होते गए वैसे ही बिहार से लालू का भी पलायन होने लगा। अब ये कहावत भी कही सुनने को नहीं मिलती कि जब तक रहेगा समोसे में आलू तब तक रहेगा बिहार में लालू। 90 के दौड़ में किंग मेकर की भूमिका निभाते निभाते जेल की यात्रा पर लालू निकल पड़े। जेल जाने के पहले लालू ने पत्नी राबड़ी को मुख्यमंत्री बनाया लेकिन शासन जेल से लालू ही चलाते रहे।

लेकिन 2005 आते आते बिहार की गद्दी राजद से छिटक गई और लालू पलायन होकर अब दिल्ली के हो गए। यहां भी 2009 तक लालू का सिक्का खूब चला लेकिन 2009 के बाद के UPA 2 के शासनकाल में उन्हें कोई मंत्रीपद नहीं मिला। 2010 के बिहार चुनाव में भी बिहार की सत्ता नीतीश के हाथ ही रही। 2014 में लालू ने फिर से पूरा दमखम लगाया लेकिन मोदी की आंधी में उड़ गए।

फिर तो लालू को लगा कि ऐसे तो राजद खत्म हो जाएगा क्यूंकि सजा के कारण खुद तो चुनाव लड़ नहीं सकते थे, तो यहां लालू ने एक तिकड़म खेला। 2015 में लालू ने नीतीश को बीजेपी से अलग करा खुद से जोड़ा। और अपने दोनों बेटों तेजप्रताप और तेजस्वी को राजनीति में लॉन्च किया। दोनों के गठबंधन ने कमाल किया और बिहार में फिर से राजद और जेडीयू का शासनकाल शुरू हुआ। लेकिन 2017 आते आते तेजस्वी के ऊपर घोटालों में शामिल होने का आरोप लगा और सरकार गिर गई। फिर नीतीश ने बीजेपी के साथ सरकार बनाई। 2020 के चुनाव में भी नीतीश मोदी के गठबंधन के बावजूद राजद बिहार में 75 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी।

राजद सबसे बड़ी पार्टी तो बनी लेकिन परिवार में बिखराव साफ साफ दिख रहा था। तेजस्वी ने अपने इर्द गिर्द ऐसे लोगों का घेरा बनाना शुरू किया जिससे परिवार के सदस्यों में घुटन महसूस होने लगी। तेजप्रताप द्वारा बार बार जयचंदों की बात उठाई जाने लगी। मीसा और रोहिणी ने परिवार को बांधने की पुरजोर कोशिश की लेकिन 2025 के विधानसभा चुनाव ने परिवार में बिखराव ला दिया। तेजस्वी के सामने कार्यकर्ताओं द्वारा रोहिणी जिंदाबाद के नारे लगाए जा रहे थे संजय यादव और रमीज का नाम खुल कर सामने आ चुका था। मीडिया में परिवार से जो बात  छन कर आई और ऐसा कहा भी जा रहा है कि रोहिणी संजय यादव को लालू की गद्दी देने को राजी नहीं थी। रोहिणी ने सीधा कह दिया कि संजय यादव को आप सांसद या विधायक बनवा दीजिए लेकिन लालू जी की कुर्सी पर नहीं बैठा सकते। यही रोहिणी की नाराजगी का कारण था। और इसी नाराजगी में रोहिणी ने ‘X’ पर लिखा “मैं राजनीति से संन्यास ले रही हूं और परिवार से भी नाता तोड़ रही हूं। संजय यादव और रमीज ने मुझसे यही कहने को कहा था, और मैं सारा दोष अपने ऊपर ले रही हूं।”

Sandeepak Kumar
Author: Sandeepak Kumar

संदीपक कुमार, पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 साल से अधिक का अनुभव। ई टीवी से कैरियर की शुरुआत की। महुआ, कशिश न्यूज़,न्यूज 29 जैसे चैनल में बतौर पैनल प्रोड्यूसर और पीसीआर हेड के तौर पर काम किया। रायपुर आईबीसी 24, चंडीगढ़ न्यूज 18 में सीनियर प्रोड्यूसर कार्यरत रहे। कंटेंट डिजायनर के साथ ही स्क्रिप्ट राइटिंग, पैनलिंग और डिजिटल में कार्य का भी अनुभव रहा है।

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