कठपुतली कला बन रहा शिक्षा और बाल विवाह जैसी कुरीति को समाप्त करने का जरिया

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बिहार जैसे अशिक्षि और कम विकसित राज्यों में बालिका शिक्षा और बाल विवाह समाज के लिए एक कोढ़ की तरह है। इस तरह के अभिशाप से निकालने के लिए सरकारों द्वारा कई कार्यक्रम शुरू किए गए, लेकिन आजादी के 78 सालों बाद भी समाज की यह कुरीति खत्म होने का नाम नहीं ले रही।

इसी कड़ी में ज्योति महिला समाख्या एवं मंत्रा4चेंज के माध्यम से बालिका शिक्षा एवं बाल विवाह को लेकर कठपुतली कला के माध्यम से जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम बुधवार को मुजफ्फरपुर के बंदरा प्रखंड के बरियारपुर माझी टोला, बड़गांव पंचायत के बगाही मध्य विद्यालय सहित तीन जगहों पर आयोजित किए गए।

“बाल विवाह के मिटाव हो भईया” एवं “बालिका शिक्षा के बढ़ाव हो भैया” जैसे गानों को कठपुतली कला के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। कठपुतली कलाकार सुनील सरला, अनिल कुमार ठाकुर, आदित्य सुमन द्वारा कठपुतली कला, गीत-संगीत और नुक्कड़ नाटक के माध्यम से शिक्षा के महत्व को बताया गया।

इसमें बालिका शिक्षा पर जोर देने के साथ ही बाल विवाह को जड़ से समाप्त करने के लिए कठपुतली कला के माध्यम से जागरूक किया गया। इस अवसर पर मुख्य रूप से प्रोफेसर संतोष सारंग, रागिनी कुमारी, रूपा कुमारी, लक्की, सुलेखा, प्रधानाध्यापक नवल किशोर मौजूद थे।

Sandeepak Kumar
Author: Sandeepak Kumar

संदीपक कुमार, पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 साल से अधिक का अनुभव। ई टीवी से कैरियर की शुरुआत की। महुआ, कशिश न्यूज़,न्यूज 29 जैसे चैनल में बतौर पैनल प्रोड्यूसर और पीसीआर हेड के तौर पर काम किया। रायपुर आईबीसी 24, चंडीगढ़ न्यूज 18 में सीनियर प्रोड्यूसर कार्यरत रहे। कंटेंट डिजायनर के साथ ही स्क्रिप्ट राइटिंग, पैनलिंग और डिजिटल में कार्य का भी अनुभव रहा है।

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