भारत की नई पीढ़ी को व्यवस्थित, सशक्त एवं संस्कारित बनाने को लेकर मंथन
सम्मेलन में बीआरएबीयू के कुलपति डॉ. दिनेश चंद्र राय रहे मौजूद
11 से 14 फ़रवरी तक चलने वाले प्रांतीय प्रधानाचार्य सम्मेलन का शुभारंभ बुधवार को “पाँच परिवर्तन” झांकी में प्रदर्शित पाँचों उद्देश्यों के समक्ष उपस्थित अतिथियों, शिक्षकगण एवं प्रधानाचार्यों ने दीप प्रज्वलित कर औपचारिक शुरुआत की। दीप प्रज्वलन के पश्चात चार दिवसीय सम्मेलन की जरूरत और रूपरेखा पर सभी आमंत्रित अतिथियों ने अपनी बात रखी।
मुख्य वक्ता डॉ. दिनेश चंद्र राय ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा और शिक्षक राष्ट्र निर्माण का सबसे प्रभावी और सशक्त माध्यम हैं। सरस्वती विद्या मंदिर का उद्देश्य शैक्षणिक ज्ञान के साथ विद्यार्थियों में चरित्र, संस्कार एवं सेवा भाव का निर्माण करना है। गंगा और अपने गाँव को सुदृढ़ नहीं करेंगे, तब तक भारतीय संस्कारों को मजबूत करना संभव नहीं है।

इसके पश्चात लोक शिक्षा समिति के महामंत्री द्वारा अध्यक्षीय भाषण दिया गया। अपने संबोधन में डॉ. सुबोध कुमार ने परिवार, संस्कार और सामाजिक दायित्वों से दूर होने के पीछे मोबाइल फोन को वजह बताया। वहीं लोक शिक्षा समिति के महामंत्री एवं शिक्षाविद् डॉ. कृष्णवीर सिंह शाक्य ने अपने संबोधन में शिक्षा की गुणवत्ता, शिक्षक की केंद्रीय भूमिका तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर अपनी बातें रखी।
कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षकों को क्षेत्रीय संगठन मंत्री श्री ख्यालीराम ने भी संबोधित करते हुए कहा कि का रहा शिक्षण संस्थान समाज की रीढ़ हैं और सशक्त राष्ट्र की आधारशिला यहीं से रखी जाती है। बुधवार के कार्यक्रम के समापन अवसर पर भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय के सचिव डॉ. ललित किशोर जी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
डॉ. ललित किशोर ने कहा कि यह सम्मेलन शैक्षणिक आयोजन के साथ साथ राष्ट्र निर्माण की दिशा में सामूहिक चिंतन एवं संकल्प का सशक्त मंच है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में शिक्षक एवं प्रधानाचार्य उपस्थित रहे तथा देशभक्ति के नारों से संपूर्ण वातावरण राष्ट्रप्रेम से भर उठा।

