मोतीपुर की पचरुखी शाखा के बाद पताही शाखा में भी कई खातों पर रोक, लेनदेन ठप होने से परेशान लोग
मुजफ्फरपुर: जिले के मोतीपुर प्रखंड स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा की पचरुखी शाखा में एक साथ दर्जनों ग्राहकों के बैंक खाते फ्रीज होने की सूचना से हड़कंप मच गया है। बैंक पहुंचे ग्राहकों को बताया जा रहा है कि उनके खातों पर साइबर फ्रॉड से संबंधित शिकायत होने के कारण लेनदेन पर रोक लगाई गई है।
जानकारी के अनुसार, खाते फ्रीज होने के बाद ग्राहक जब बैंक से कारण पूछते हैं तो उन्हें साइबर थाना से संपर्क करने की सलाह दी जाती है। वहीं साइबर थाना में उन्हें बताया जाता है कि उनके खाते से जुड़े किसी साइबर फ्रॉड मामले में दूसरे जिले या राज्य के किसी थाने में शिकायत दर्ज है।
सबसे बड़ी परेशानी यह है कि अधिकांश खाताधारकों का दावा है कि उन्हें किसी भी प्रकार के साइबर अपराध या संदिग्ध लेनदेन की जानकारी नहीं है। खाते फ्रीज होने के कारण उनकी पूरी बैंकिंग व्यवस्था ठप हो गई है। वे न तो पैसे निकाल पा रहे हैं और न ही किसी प्रकार का डिजिटल लेनदेन कर पा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, बैंक ऑफ बड़ौदा की पताही शाखा में भी हाल के दिनों में इसी तरह के कई मामले सामने आए हैं, जहां ग्राहकों के खाते साइबर फ्रॉड का हवाला देकर फ्रीज कर दिए गए। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या बैंकिंग प्रणाली में साइबर शिकायतों के आधार पर खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया में पर्याप्त पारदर्शिता और समय पर सूचना देने की व्यवस्था है या नहीं।
पीड़ित ग्राहकों का कहना है कि समय और दूरी की वजह से दूसरे जिलों या राज्यों में दर्ज मामलों की पैरवी करना उनके लिए बेहद कठिन है। कई लोग महीनों तक अपने ही पैसे का इस्तेमाल नहीं कर पाते, जबकि उन्हें यह भी स्पष्ट नहीं बताया जाता कि उनके खाते पर कार्रवाई किस आधार पर हुई है।
लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने आम ग्राहकों की चिंता बढ़ा दी है। अब सवाल यह है कि क्या साइबर अपराध पर कार्रवाई के नाम पर निर्दोष खाताधारकों को भी अनावश्यक परेशानी झेलनी पड़ रही है, या फिर जांच प्रक्रिया में कहीं बड़ी खामी है?
(नोट: यह खबर स्थानीय स्तर पर प्राप्त सूचनाओं और पीड़ितों के दावों पर आधारित है। संबंधित बैंक, साइबर पुलिस या प्रशासन की आधिकारिक पुष्टि एवं पक्ष सामने आने पर समाचार को अपडेट किया जाएगा।)








