मुजफ्फरपुर केंद्रीय कारा की व्यवस्था पर उठे सवाल; न्यायिक अभिरक्षा से लौटे सामाजिक कार्यकर्ता ने मांगी उच्चस्तरीय जांच

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मुजफ्फरपुर, 1 अगस्त: मुजफ्फरपुर के सामाजिक एवं आरटीआई कार्यकर्ता देवव्रत कुमार साहनी ने शहीद खुदीराम बोस केंद्रीय कारा, मुजफ्फरपुर में न्यायिक अभिरक्षा के दौरान अपने अनुभवों के आधार पर बिहार सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को विस्तृत शिकायत भेजी है। शिकायत में उन्होंने जेल की व्यवस्थाओं, भोजन की गुणवत्ता, अत्यधिक भीड़ तथा भवन की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त करते हुए उच्चस्तरीय जांच और आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई की मांग की है।

शिकायत मुख्य सचिव, गृह (कारा) विभाग के अपर मुख्य सचिव, बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष, महानिरीक्षक (कारा) तथा जिला पदाधिकारी-सह-कारा निरीक्षक, मुजफ्फरपुर को भेजी गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि न्यायिक अभिरक्षा के दौरान उन्होंने जिन परिस्थितियों को स्वयं देखा और अनुभव किया, उनके आधार पर यह प्रतिवेदन तैयार किया गया है।

क्षमता से अधिक बंदी होने का दावा
शिकायत में दावा किया गया है कि केंद्रीय कारा में बंदियों की संख्या स्वीकृत क्षमता से अधिक है। इसके कारण बैरकों में पर्याप्त स्थान नहीं मिल पा रहा है तथा स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां उत्पन्न हो रही हैं। शिकायतकर्ता ने इसे कैदियों के अधिकारों और निर्धारित मानकों से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए इसकी स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। आपको बता दें कि इस जेल में 2130 कैदियों के ही रखने की ही सुविधा है जिसमें से 150 की संख्या महिलाओं के लिए आरक्षित है। लेकिन शिकायतकर्ता के अनुसार औसतन लगभग 24 से 25 सौ तक कैदी इसमें रहते हैं।

भोजन व्यवस्था में भी दिखी खामियां
देवव्रत कुमार साहनी ने आरोप लगाया है कि जेल में उपलब्ध कराए जा रहे भोजन की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने भोजन, राशन खरीद में लगे वेंडर्स और राशन के रॉ मटेरियल से संबंधित व्यवस्थाओं की निष्पक्ष जांच करने की मांग की। उन्होंने किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों और वेंडरों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।

भवन की सुरक्षा और जर्जर हालात को लेकर चिंता
शिकायत में जेल की कुछ बैरकों और भवनों की जर्जर स्थिति का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि भवनों का तकनीकी परीक्षण करा सुरक्षा और व्यवस्था की गुणवत्ता तय जाना चाहिए ताकि किसी संभावित दुर्घटना की आशंका को समय रहते दूर किया जा सके।

शिकायत पत्र में की गई प्रमुख मांगे
शिकायत में गृह विभाग एवं बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग की संयुक्त उच्चस्तरीय जांच, भोजन एवं राशन व्यवस्था का विशेष ऑडिट, जेल भवन के दीवारों के साथ साथ मूलभूत सुविधाओं का भी परीक्षण तथा जेल में भीड़ कम करने के लिए विचाराधीन बंदियों के मामलों की शीघ्र जांच की मांग की गई है।

आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार
समाचार प्रकाशित किए जाने तक इस शिकायत पर जेल प्रशासन अथवा संबंधित सरकारी अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। यदि इस मामले में संबंधित पक्ष का कोई बयान या स्पष्टीकरण प्राप्त होता है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

Sandeepak Kumar
Author: Sandeepak Kumar

संदीपक कुमार, पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 साल से अधिक का अनुभव। ई टीवी से कैरियर की शुरुआत की। महुआ, कशिश न्यूज़,न्यूज 29 जैसे चैनल में बतौर पैनल प्रोड्यूसर और पीसीआर हेड के तौर पर काम किया। रायपुर आईबीसी 24, चंडीगढ़ न्यूज 18 में सीनियर प्रोड्यूसर कार्यरत रहे। कंटेंट डिजायनर के साथ ही स्क्रिप्ट राइटिंग, पैनलिंग और डिजिटल में कार्य का भी अनुभव रहा है।

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