नई दिल्ली, 1 अगस्त: साल 1983 से चले आ रहे महानदी जल विवाद के समाधान की दिशा में एक नई पहल होती दिख रही है। केंद्र सरकार की मध्यस्थता से 43 साल से चले आ रहे ओडिशा और छत्तीसगढ़ में चले आ रहे महानदी जल विवाद का निपटारा होने की संभावना है। अगले 3 से 4 महीनों के भीतर यहां की दिवाली तक दोनों राज्यों के बीच आपसी सहमति से विवाद सुलझाने की स्थिति बन सकती है। दोनों राज्यों ने तकनीकी स्तर पर बातचीत जारी रखने और संवाद के माध्यम से समाधान तलाशने की प्रतिबद्धता दोहराई है।
नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय शामिल हुए। बैठक के बाद ओडिशा के मुख्यमंत्री ने कहा कि हम प्रयास कर रहे हैं कि दिवाली से पहले इस विवाद का सर्वसम्मत समाधान निकल आए।केंद्र सरकार ने दोनों राज्यों को तकनीकी विशेषज्ञों के स्तर पर चर्चा जारी रखने का सुझाव दिया है। साथ ही, अन्य अंतर-राज्यीय जल विवादों के सुलझाने के तरीकों को उदाहरणों का उल्लेख करते हुए सहमति आधारित रास्ता अपनाने पर जोर दिया गया।
न्यायाधिकरण ने भी तय की समयसीमा
इसके पहले इस विवाद में महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण ने 20 अप्रैल को एक आदेश पारित किया था कि यदि दोनों राज्य आपसी सहमति से समाधान का रास्ता नहीं निकाल पा रहे हैं, तब की स्थिति में न्यायाधिकरण उपलब्ध तथ्यों और कानूनी आधार पर अपना निर्णय सुनाएगा।
ओडिशा सरकार का किसानों और जल संसाधनों की सुरक्षा पर जोर
बैठक के बाद ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने सोशल मीडिया पर कहा कि बैठक में राज्य के किसानों, जल संसाधनों और लोगों के हितों को प्रमुखता से रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि दोनों राज्य रचनात्मक संवाद, सहयोग और पारस्परिक सम्मान के आधार पर स्थायी एवं न्यायसंगत समाधान की दिशा में आगे बढ़ेंगे।
वहीं, बैठक के बाद अधिकारियों ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने भी ओडिशा की चिंताओं को सकारात्मक रूप से लिया है। अधिकारियों के अनुसार संयुक्त तकनीकी समिति की कई दौर की बैठकों में कई तकनीकी बिंदुओं पर सहमति बन चुकी है और कुछ मामलों की तकनीकी पहलू पर आगे भी चर्चा जारी रहेगी।
क्या है महानदी जल विवाद?
दरअसल महानदी जल बंटवारे को लेकर ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच विवाद की नई शुरुआत वर्ष 2016 से शुरू हुआ जब ओडिशा ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा अपस्ट्रीम के क्षेत्रों में बराज के निर्माण पर आपत्ति जताई। ओडिशा का कहना है कि छत्तीसगढ़ द्वारा नदी पर बनाए गए बैराजों से मानसून के बाद उसके हिस्से में पानी का प्रवाह प्रभावित होता है। दूसरी ओर, छत्तीसगढ़ का पक्ष है कि उसके राज्य में महानदी का बड़ा जलग्रहण क्षेत्र होने के कारण उसे उपलब्ध जल संसाधनों के उपयोग का अधिकार है।
कानूनी प्रक्रिया से संवाद की ओर
वर्ष 2016 में केंद्र सरकार ने बातचीत के माध्यम से समाधान का प्रयास किया था, लेकिन उस समय मामला कानूनी प्रक्रिया में चला गया। इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर वर्ष 2018 में महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया गया। हाल के वर्षों में दोनों राज्यों के बीच संवाद की प्रक्रिया फिर से तेज हुई है और अब केंद्र सरकार की पहल से समाधान की संभावना बढ़ी है।
यदि दोनों राज्य अगले 3 4 महीनों में नतीज़ों पर सहमत हो जाते हैं, तो यह देश के प्रमुख अंतर-राज्यीय जल विवादों में से एक के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा।









