जीतते ही प्रशांत किशोर ने बिहार के मुख्यमंत्री बदलने की कि मांग, सीएम सम्राट चौधरी ने दी बधाई
पटना, 3 अगस्त: बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जनता ने एक बड़ा संदेश दिया है। प्रशांत किशोर बांकीपुर उपचुनाव में जीत दर्ज कर चुनाव रणनीतिकार से राजनेता बन गए हैं। प्रशांत किशोर ने जन सुराज पार्टी (JSP) की तरफ से पहली बार विधानसभा सीट जीतकर पार्टी का खाता खोल दिया है। उन्होंने भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को लगभग 19 हजार वोटों के अंतर से पराजित किया।
मतगणना के अंतिम परिणामों के अनुसार, प्रशांत किशोर को 63,203 वोट मिले, जबकि भाजपा के नीरज कुमार सिन्हा को 44,250 वोट प्राप्त हुए। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की उम्मीदवार रेखा गुप्ता को 14,085 वोट मिले। पूरे मतगणना के दौरान किसी भी राउंड में एक बार भी ऐसा वक्त नहीं आया जब बीजेपी प्रशांत किशोर से आगे हो। सिर्फ चौथा राउंड, 29 राउंड, और 31वें राउंड में ही प्रशांत किशोर से ज्यादा मत ले पाई। ज्यादा मत ला पाई न की आगे रही।
बांकीपुर का परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ रहा है। नितिन नबीन का यह किला हुआ करता था। 1995 के बाद बीजेपी यहां से कभी नहीं हारी। चुनाव दर चुनाव जीत में मतों का आंकड़ा बढ़ता ही रहा। बांकीपुर में इस बार मात्र लगभग 35 प्रतिशत ही वोट पड़े। तब ही यह मान लिया गया था कि कम वोट प्रतिशत कही बीजेपी के लिए भाड़ी न पड़ जाए। आपको यह बता दें कि बांकीपुर में उपचुनाव नितिन नबीन के राज्यसभा में जाने के कारण रिक्त होने पर कराई गई थी।
चुनाव परिणाम के अनुसार जन सुराज पार्टी को 49.22 प्रतिशत, भाजपा को 34.41 प्रतिशत यानी वोटिंग प्रतिशत भी लगभग यही था, और राजद को 10.96 प्रतिशत वोट शेयर मिला। वहीं, NOTA को 641 वोट मिले, जो अन्य 22 उम्मीदवारों में से कईयों को मिले मत से कहीं अधिक थे।
बांकीपुर के परिणाम ने इस बात की भी दस्तक दे दी कि भाजपा, जदयू और राजद के पारंपरिक वोट बैंक में भी सेंध लगाई जा सकती है। नवंबर 2025 के विधानसभा चुनाव की तुलना में भाजपा और राजद दोनों के वोट प्रतिशत में बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जबकि जन सुराज पार्टी को यही गिरावट ट्रांसफर होकर मजबूत बढ़त हासिल करायी।
यह जीत प्रशांत किशोर के राजनीतिक सफर का अहम पड़ाव मानी जा रही है। इससे पहले 2025 के विधानसभा चुनाव और उसके पहले हुए उपचुनावों में उनकी पार्टी को कोई सफलता नहीं मिली थी। इस बार उन्होंने पूरे चुनाव अभियान के दौरान उन्होने बिहार में वोट चोरी को मुद्दा मुख्यमंत्री को बदलने के तौर पर लगाया। प्रशांत किशोर ने पूरे चुनाव अभियान के दौरान इस बात को प्रमुखता से रखा कि बिहार की जनता ने नीतीश कुमार को वोट देकर मुख्यमंत्री बनाया लेकिन बीजेपी ने बैकडोर से मुख्यमंत्री को बदल दिया। इसे राज्य सरकार की नीतियों और जनसमर्थन की परीक्षा के रूप में प्रस्तुत किया था।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की जीत बिहार की आगामी राजनीतिक रणनीतियों चुनावों और दलों के समीकरणों पर प्रभाव डाल सकता है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि जन सुराज पार्टी विधानसभा में अपनी पहली जीत को आने वाले समय में बिहार में किस तरह राजनीतिक विस्तार में बदलती है।









