
राहुल गांधी यूपीआई ट्रांजैक्शन पर लगने वाले शुल्क को ‘मोदी टैक्स’ बता रहे हैं, लेकिन संसद में पेश कांग्रेस सांसदों की रिपोर्ट इसके उलट क्या कहती है? जानें पूरी बात।
Politics on UPI Charges: UPI पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत Merchant Discount Rate (MDR) को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस तेज हो गई है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने UPI शुल्क को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। जबकि उन्हीं के सांसदों की समिति ने इस चार्ज को लेकर सिफारिश की थी।
राजनीतिक विवाद के बीच संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति की एक रिपोर्ट ने बहस को एक अलग दिशा दे दी है। रिपोर्ट में UPI के लिए एक टिकाऊ राजस्व व्यवस्था और टियर-बेस्ड MDR मॉडल की जरूरत बताई गई थी। खास बात यह है कि उस समिति में शामिल कांग्रेस के पांच सांसदों ने प्रकाशित कार्यवाही में उनकी ओर से इस सिफारिश को लागू करने में कोई असहमति दर्ज नहीं कराई गई थी।
राहुल गांधी ने ‘UPI टैक्स’ को मोदी टैक्स बता किया हमला
नए MDR फ्रेमवर्क के सामने आने के बाद राहुल गांधी ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि UPI पर शुल्क लगाने का फैसला बाहरी विशेषकर अमेरिका के दबाव में लिया गया है और प्रधानमंत्री से इसे वापस लेने की मांग की है। हालांकि, सरकार ने विदेशी दबाव के आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि यह फैसला UPI इकोसिस्टम की दीर्घकालिक स्थिरता और सुरक्षा को ध्यान में रखकर किया गया है।
कांग्रेस सांसदों वाली समिति की रिपोर्ट वायरल
वित्त संबंधी स्थायी समिति की रिपोर्ट में UPI के लिए राजस्व मॉडल की जरूरत पर जोर दिया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा व्यवस्था में UPI के संचालन, सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी लागत की भरपाई के लिए टिकाऊ व्यवस्था जरूरी है।
इस समिति में पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के अलावा कांग्रेस के मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के. गोपीनाथ भी सदस्य थे। समिति की अध्यक्षता बीजेपी सांसद भर्तृहरि महताब कर रहे थे। रिपोर्ट को अमल में लिए जाने के दौरान कांग्रेसी सदस्यों की ओर से कोई आपत्ति दर्ज नहीं किए जाने की बात सामने आई है।
कांग्रेस सांसदों ने MDR चार्जेज का किया था समर्थन?
यहीं इस पूरे विवाद का महत्वपूर्ण तथ्य है। समिति के कांग्रेस सांसदों ने कितना चार्जेज लगाया जाए इसके लिए उनकी तरफ से कुछ भी नहीं कहा गया था, बल्कि UPI के लिए टियर-बेस्ड MDR या टिकाऊ राजस्व मॉडल की जरूरत पर जोर दिया गया था।
जहां एक तरफ राहुल गांधी नए MDR फ्रेमवर्क का विरोध कर रहे हैं, वहीं समिति की पुरानी रिपोर्ट में UPI के लिए टिकाऊ राजस्व व्यवस्था की जरूरत बताई गई थी। इसी अंतर को लेकर अब राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
सरकार ने कहा यह “MDR” है, ‘टैक्स’ नहीं
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि MDR के तहत सरकार कोई टैक्स नहीं वसूल रही है बल्कि MDR से मिलने वाली राशि पेमेंट इकोसिस्टम से जुड़े हिस्सेदारों, जैसे कि बैंकों और पेमेंट ऐप प्रोवाइडर्स के बीच वितरित होगी।
इस के तहत 15 अक्टूबर 2026 से पात्र Person-to-Merchant यानी P2M UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR लागू होगा, जब भुगतान 2,000 रुपए से अधिक होगा। 75,000 या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन पर अधिकतम 300 रुपये MDR सीमित किया जाएगा।
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
सरकार ने कहा है कि लगभग 96 प्रतिशत P2M ट्रांजैक्शन नए MDR से प्रभावित नहीं होंगे। वहीं एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किया जाने वाला UPI भुगतान मुफ्त रहेगा। ₹2,000 तक के मर्चेंट भुगतान और छोटे कारोबारियों के लिए जीरो-MDR व्यवस्था के तहत आने वाले भुगतान भी मुफ्त रहेंगे।
आखिर राजनीतिक विवाद क्यों?
UPI शुल्क को लेकर अब बहस केवल 0.4 प्रतिशत MDR तक सीमित नहीं है। एक तरफ विपक्ष नए शुल्क को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है, वहीं दूसरी तरफ संसद की स्थायी समिति की पुरानी सिफारिश में UPI के लिए टिकाऊ राजस्व मॉडल की जरूरत बताई गई थी।
ऐसे में सवाल अब यह उठ रहा है कि मौजूदा 0.4% MDR का विरोध उस पुराने राजस्व मॉडल से अलग मुद्दा है, या दोनों को एक ही बहस के हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए?
नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध सार्वजनिक दस्तावेजों और प्रकाशित रिपोर्टों के आधार पर तैयार की गई है। फिलहाल सरकार ने MDR वापस लेने से इनकार किया है और नया फ्रेमवर्क 15 अक्टूबर से लागू करने की तैयारी है।










