बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ (गोप गुट) मुजफ्फरपुर के निर्देशन में मंगलवार को राज्य कमेटी के आह्वान पर एकदिवसीय पदयात्रा का आयोजन किया गया। “शिक्षा बचाओ-देश बचाओ” अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम में जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए सैकड़ों शिक्षकों ने भाग लिया। पद यात्रा का उद्देश्य सरकारी शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने शिक्षकों की लंबित समस्याओं के समाधान की मांग उठाने तथा शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करना था

कार्यक्रम की शुरुआत संघ भवन, सदर अस्पताल रोड, मुजफ्फरपुर से प्रारंभ हुई। वहां से शिक्षक शांतिपूर्ण ढंग से पदयात्रा करते हुए कंपनी बाग, जुरन छपरा और सरकारी बस स्टैंड होते हुए शहीद ख़ुदी राम बोस स्मारक स्थल पहुंचे। पद यात्रा के समापन के बाद स्मारक स्थल पर एक सभा आयोजित की गई जिसमें शिक्षक नेताओं ने शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों की समस्याओं पर अपने विचार रखें
सभा को संबोधित करते हुए जिला सचिव पवन कुमार ने कहा कि अभी सरकारी शिक्षा व्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है। शैक्षणिक संसाधनों की कमी, शिक्षकों से जुड़ी विभिन्न प्रशासनिक समस्याएं और नीतिगत निर्णयों का असर सीधे विद्यार्थियों, विशेषकर गरीब एवं अति पिछड़े वर्ग के बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि इन समस्याओं का समय रहते समाधान नहीं किया गया तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लक्ष्य प्रभावित हो सकता है।

समाज में रह रहे आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए सरकारी विद्यालय शिक्षा का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इसलिए शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना केवल शिक्षकों का नहीं, बल्कि पूरे समाज का दायित्व है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि शिक्षकों की व्यावहारिक समस्याओं पर सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए आवश्यक निर्णय लिए जाएं।
इसके बाद उन्होंने सीधे शिक्षकों की मांगो पर सबका ध्यान खींचा।सभा के दौरान उन्होंने शिक्षकों के प्रमुख मांग रखी जिसमें कहा गया है कि वर्ष 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से मुक्त करते हुए उन्हें प्रोन्नति का लाभ प्रदान किया जाए। उनका कहना था कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के अनुभव को ध्यान में रखते हुए उनके पदोन्नति संबंधी मामलों का समाधान किया जाना चाहिए।

संघ ने यह भी मांग उठाई कि वरीयता शिक्षक तथा विद्यालय अध्यापक को सहायक शिक्षक का दर्जा दिया जाए, ताकि सेवा शर्तों में समानता सुनिश्चित हो सके। इसके अलावा शिक्षकों ने कैशलेस चिकित्सा सुविधा को प्रभावी रूप से लागू करने, स्थानांतरण प्रक्रिया से संबंधित समस्याओं का समाधान करने तथा चिकित्सा भत्ता एवं आवास भत्ता से जुड़े मामलों में स्पष्ट नीति अपनाने की मांग की।
सभा में वक्ताओं ने शिक्षा के निजीकरण पर भी चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि सरकारी विद्यालयों को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाने चाहिए ताकि प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। उन्होंने कहा कि शिक्षा एक सामाजिक अधिकार है और इसे सभी वर्गों तक समान रूप से पहुंचाना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
शिक्षकों ने विद्यालय संचालन से जुड़े एक अन्य मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने मांग की कि शनिवार को विद्यालयों के संचालन की व्यवस्था पूर्व की तरह हाफ डे (HALF DAY) की जाए। उनका कहना था कि इससे शिक्षकों एवं विद्यार्थियों दोनों को सुविधा होगी और विद्यालयों में पूर्व से चली आ रही व्यवस्था बहाल हो सकेगी।
सभा में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि उनकी मांगें लंबे समय से विभिन्न स्तरों पर उठाई जाती रही हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार शिक्षकों की समस्याओं का समाधान करने के लिए सकारात्मक पहल करेगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि मांगों पर उचित निर्णय नहीं लिया गया तो राज्य इकाई के निर्देशानुसार दूसरे चरण में व्यापक आंदोलन चलाया जाएगा। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाने के पक्ष में है।
कार्यक्रम के दौरान शिक्षक नेताओं ने शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सरकार, प्रशासन और समाज के सभी वर्गों के बीच समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उनका कहना था कि शिक्षकों की समस्याओं का समाधान होने से विद्यालयों में शैक्षणिक वातावरण और अधिक मजबूत होगा तथा इसका लाभ सीधे विद्यार्थियों को मिलेगा।
पदयात्रा एवं सभा में बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ (गोपगुट) के जिलाध्यक्ष श्यामनंदन सिंह, जिला मंत्री महासचिव (गोपालगंज) अरुण कुमार, कार्यालय सचिव मो. जाहिद हुसैन, कोषाध्यक्ष अनिल कुमार, उपाध्यक्ष राजमोहन दास, नागेन्द्र राम, दिनेश कुमार यादव, विनोद कुमार, लखेंद्र कुमार, प्रवीण कुमार, राजेश कुमार, उमेश कुमार, संजय कुमार, उपेंद्र राम, मो. इमरानुद्दीन, दिनेश कुमार, कुमार निशांत, मो. निजामुद्दीन, उमेश कुमार (प्रवक्ता), राजेश पासवान सहित बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन संगठन के पदाधिकारियों द्वारा सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करने के साथ हुआ। संघ ने कहा कि शिक्षा और शिक्षकों से जुड़े मुद्दों पर आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाई जाएगी तथा राज्य स्तर पर तय कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी जारी रहेगी। यह पदयात्रा जिले में सरकारी शिक्षा व्यवस्था, शिक्षक हितों और विद्यालयी सुधारों से जुड़े विषयों पर व्यापक चर्चा का केंद्र रही।









