नई दिल्ली: विदेशी फंडिंग से जुड़े नियमों में बदलाव के प्रस्ताव को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच टकराव के आसार बढ़ गए हैं। Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 को लेकर विपक्षी दलों ने इसके कुछ प्रावधानों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने बिल का विरोध करने की रणनीति तैयार की है।
प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य Foreign Contribution (Regulation) Act, 2010 में बदलाव करना है। बिल में विदेशी योगदान प्राप्त करने वाली संस्थाओं के FCRA पंजीकरण के रद्द होने, समाप्त होने या वापस किए जाने की स्थिति में विदेशी फंड और उससे बनाई गई संपत्तियों के प्रबंधन के लिए नई व्यवस्था प्रस्तावित की गई है।
विपक्ष ने बिल पर उठाए सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने संकेत दिया है कि विपक्षी दल बिल के खिलाफ संसद में संयुक्त रणनीति बना सकते हैं। वहीं कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने प्रस्तावित कानून पर कड़ी आपत्ति जताई है।
NCP (SP) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने बिल के मौजूदा स्वरूप पर सवाल उठाते हुए सरकार से इसे वापस लेने या संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने की मांग की है। उनका कहना है कि विदेशी फंडिंग को हर स्थिति में संदेह की नजर से देखना उचित नहीं है।
कांग्रेस ने संसद में महत्वपूर्ण कार्यवाही की संभावना को देखते हुए अपने सांसदों को 10, 11 और 12 अगस्त को सदन में मौजूद रहने के लिए व्हिप भी जारी किया है।
क्या है FCRA Amendment Bill 2026?
FCRA यानी Foreign Contribution (Regulation) Act भारत में विदेशी योगदान प्राप्त करने और उसके इस्तेमाल को नियंत्रित करता है। प्रस्तावित 2026 संशोधन में FCRA पंजीकरण से जुड़ी प्रक्रिया और विदेशी फंड से तैयार संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर कई बदलाव किए गए हैं।
PRS Legislative Research के अनुसार, 15 जुलाई 2026 तक देश में 14,449 FCRA प्रमाणपत्र सक्रिय थे, जबकि 22,498 रद्द और 15,212 समाप्त माने गए थे।
नामित प्राधिकारी को मिलेगी अहम भूमिका
बिल में नामित प्राधिकारी (Designated Authority) की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। किसी संस्था का FCRA पंजीकरण रद्द होने, संस्था द्वारा प्रमाणपत्र वापस किए जाने या प्रमाणपत्र की अवधि समाप्त होने की स्थिति में विदेशी योगदान और उससे बनाई गई संपत्तियों को इस प्राधिकरण के नियंत्रण में रखने का प्रावधान है।
प्रस्तावित व्यवस्था में प्राधिकरण को ऐसी संपत्तियों के प्रबंधन और निगरानी की जिम्मेदारी दी जा सकती है। यदि संबंधित संस्था निर्धारित अवधि में अपना पंजीकरण बहाल या दोबारा प्राप्त नहीं कर पाती है, तो संपत्तियों के स्थायी रूप से प्राधिकरण के अधीन जाने का प्रावधान भी बिल में है।
Section 14B, 16A और 16B क्यों चर्चा में?
FCRA संशोधन में कुछ धाराएं खास तौर पर चर्चा में हैं।
Section 14B में FCRA प्रमाणपत्र के समाप्त माने जाने की परिस्थितियों से जुड़ी व्यवस्था प्रस्तावित है। इसमें प्रमाणपत्र के नवीनीकरण के लिए आवेदन नहीं करने या नवीनीकरण नहीं होने जैसी स्थितियां शामिल हैं।
Section 16A के तहत FCRA पंजीकरण समाप्त या रद्द होने की स्थिति में विदेशी योगदान और उससे तैयार संपत्तियों को Designated Authority के अधीन रखने का प्रस्ताव है।
वहीं Section 16B को लेकर सबसे अधिक बहस हो रही है। बिल के अनुसार, संशोधित कानून उन विदेशी योगदान और संपत्तियों पर भी लागू हो सकता है जो पुराने प्रावधानों के तहत पहले से निहित थीं। इसी वजह से विपक्ष और कुछ संगठनों ने इसके संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जताई है।
सरकार की दलील क्या है?
प्रस्तावित कानून का उद्देश्य विदेशी योगदान और उससे बनाई गई संपत्तियों के प्रबंधन में निगरानी, जवाबदेही और नियमन को मजबूत करना बताया गया है। सरकार की ओर से यह तर्क दिया जा रहा है कि विदेशी धन का इस्तेमाल निर्धारित नियमों और राष्ट्रीय हित के अनुरूप होना चाहिए।
वहीं सरकार ने विपक्ष और विभिन्न संगठनों की चिंताओं को देखते हुए उनसे बातचीत भी की है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कुछ प्रतिनिधिमंडलों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा की है और सरकार की ओर से कुछ आशंकाओं को दूर करने के संकेत दिए गए हैं।
NGOs और सामाजिक संगठनों को लेकर चिंता
विपक्ष का कहना है कि नए प्रावधानों से FCRA के तहत काम करने वाले गैर-सरकारी संगठनों, सामाजिक संस्थाओं, शैक्षणिक और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े संगठनों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ सकता है।
वहीं समर्थकों का तर्क है कि विदेशी फंडिंग से जुड़ी संपत्तियों और धन के इस्तेमाल में स्पष्ट जवाबदेही जरूरी है। ऐसे में विवाद का मुख्य मुद्दा यह है कि विदेशी फंडिंग की निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित करते हुए संस्थाओं की वैध गतिविधियों के लिए पर्याप्त सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए।
संसद में आगे क्या होगा?
FCRA Amendment Bill 2026 को लेकर संसद में विपक्ष और सरकार के बीच तगड़ी बहस होने की संभावना है। विपक्ष बिल को JPC के पास भेजने की मांग कर सकता है, जबकि सरकार संशोधन को विदेशी फंडिंग व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में जरूरी कदम के रूप में पेश कर सकती है।
इस बीच, बिल के प्रावधानों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच बातचीत जारी रहने के संकेत हैं। इसलिए इसके अंतिम स्वरूप और लागू होने की स्थिति पर संसद के अंदर होने वाले बहस और प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।










