
वैशाली/मुजफ्फरपुर/खबर जिन्दगी: पारू के 3 स्वतंत्रता सेनानीयों योद्धा सिंह, अनुराग सिंह और छकौड़ी लाल साह को शहीद का दर्जा देने की मांग तेज होती जा रही है। इसी क्रम में मंगलवार को बिदुपुर प्रखंड स्थित अभियंत्रण महाविद्यालय, वैशाली में आयोजित विद्यार्थी सहयोग शिविर के दौरान तिरहुत स्नातक क्षेत्र के विधान पार्षद वंशीधर ब्रजवासी ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मुजफ्फरपुर जिले के पारू प्रखंड से जुड़े तीनों स्वतंत्रता सेनानियों को राजकीय स्तर पर शहीद का दर्जा देने की मांग की गई है।

इसके साथ ही इन तीनों महापुरुषों के सम्मान में सरैया, पारू और देवरिया रेलवे स्टेशनों का नामकरण उनके नाम पर करने के लिए केंद्र सरकार से अनुशंसा करने का भी अनुरोध किया गया है। ज्ञापन में कहा गया है कि देश की आजादी के 79 वर्ष बाद भी इन तीनों वीर सपूतों को राजकीय स्तर पर शहीद का दर्जा और अपेक्षित सम्मान नहीं मिल सका है। इसे लेकर स्थानीय लोगों में असंतोष और क्षोभ की स्थिति बताई गई है।
1942 के भारत छोड़ो आंदोलन से जुड़ा है इतिहास
विधान पार्षद वंशीधर ब्रजवासी के अनुसार, वर्ष 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान पारू थाना परिसर में तिरंगा फहराने के प्रयास के दौरान अंग्रेजी शासन की गोलीबारी में योद्धा सिंह, अनुराग सिंह और छकौड़ी लाल साह ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। उनका कहना है कि इन महापुरुषों की पुण्यतिथि के अवसर पर पारू प्रखंड में आयोजित कार्यक्रमों में स्थानीय लोगों की ओर से लंबे समय से उन्हें सरकारी स्तर पर शहीद का दर्जा देने की मांग उठाई जाती रही है।
वंशीधर ब्रजवासी ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान देने वाले इन महापुरुषों को सम्मान देना उनके प्रति श्रद्धांजलि के साथ-साथ नई पीढ़ी को स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास से जोड़ने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम होगा।
तीन रेलवे स्टेशनों के नाम बदलने की मांग
ज्ञापन में सरैया, पारू और देवरिया रेलवे स्टेशनों का नाम इन तीनों स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर रखने की मांग की गई है। इसके लिए राज्य सरकार से केंद्र सरकार को अनुशंसा भेजने का अनुरोध किया गया है। ब्रजवासी ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि राज्य सरकार इस मांग पर आवश्यक कार्रवाई करते हुए तीनों महापुरुषों को शहीद का दर्जा दिलाने और रेलवे स्टेशनों के नामकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की पहल करे।
स्थानीय मांग को मिला राजनीतिक और सरकारी संरक्षण
इस मांग के सामने आने के बाद अब पारू क्षेत्र के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास और स्थानीय शहीदों को आधिकारिक सम्मान देने का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। हालांकि, शहीद का राजकीय दर्जा और रेलवे स्टेशन के नामकरण की अंतिम प्रक्रिया संबंधित सरकारी नियमों और सक्षम प्राधिकारियों के निर्णय पर निर्भर करेगी।









