
सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार को लेकर बड़ा सवाल “सरकार से मोटे वेतन लेने के बाद भी रिश्वत ले आम आदमी के साथ विश्वासघात”
समस्तीपुर/पटना (खबर जिन्दगी): सरकारी पद और जिम्मेदारी के बावजूद रिश्वतखोरी के आरोप में बिहार निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने समस्तीपुर जिले के रोसड़ा में बड़ी कार्रवाई की है। ब्यूरो के मुताबिक भूमि सुधार उप-समाहर्ता (DCLR) कंचन कुमारी झा और उनके घरेलू नौकर सुमित कुमार को 2 लाख रुपये व वॉशिंग मशीन के साथ रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया है।
निगरानी विभाग के अनुसार दोनों को 2 लाख रुपये नकद और करीब 37 हजार रुपये कीमत की नई सैमसंग वॉशिंग मशीन के साथ रोसड़ा नगर पंचायत के वार्ड संख्या-24 स्थित DCLR के सरकारी आवास से गिरफ्तार किया गया।
भूमि विवाद मामले में रिश्वत मांगने का आरोप
यह कार्रवाई समस्तीपुर निवासी मनोज कुमार की शिकायत के आधार पर की गई। शिकायतकर्ता का आरोप था कि भूमि विवाद निराकरण वाद संख्या 20/2026-27 में उनके पक्ष में फैसला देने के एवज में रिश्वत की मांग की जा रही थी।
शिकायत मिलने के बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने आरोपों का सत्यापन कराया। सत्यापन के दौरान रिश्वत मांगने की बात प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद निगरानी थाना कांड संख्या 103/26, दिनांक 25 अगस्त 2026, दर्ज किया गया।
इसके बाद पुलिस उपाधीक्षक नरेंद्र कुमार के नेतृत्व में धावादल का गठन किया गया। कार्रवाई के दौरान आरोपी DCLR और उनके घरेलू नौकर को कथित रिश्वत के साथ गिरफ्तार किया गया।
सरकारी आवास से तलाशी में मिले 13.82 लाख रुपये
निगरानी ब्यूरो के मुताबिक गिरफ्तारी के बाद सरकारी आवास की तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान 13 लाख 82 हजार रुपये की अतिरिक्त नकद राशि बरामद होने की बात कही गई है। ब्यूरो के अनुसार दोनों आरोपियों से पूछताछ के बाद उन्हें निगरानी के विशेष न्यायालय, मुजफ्फरपुर में पेश किया जाएगा। मामले में आगे की जांच जारी है।
2026 में निगरानी की 103वीं प्राथमिकी
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के मुताबिक भ्रष्टाचार के खिलाफ वर्ष 2026 में यह उसकी 103वीं प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई है। इनमें यह 95वां ट्रैप कांड बताया गया है।
ब्यूरो के अनुसार अब तक 93 अभियुक्तों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया जा चुका है। इन कार्रवाइयों में कुल 34,34,800 रुपये की कथित रिश्वत राशि बरामद की गई है। इस मामले में 37 हजार रुपये कीमत की नई वॉशिंग मशीन की बरामदगी भी दर्ज की गई है।
2025 में दर्ज हुए थे 101 ट्रैप कांड
ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में कुल 101 ट्रैप कांड दर्ज किए गए थे और इन मामलों में 37,80,300 रुपये की रिश्वत राशि बरामद की गई थी।
बड़ा सवाल: वेतन के बावजूद रिश्वत क्यों?
इस कार्रवाई ने एक बार फिर सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को नियमित वेतन, भत्ते और कई सेवा-सुविधाएं मिलती हैं। इसके बावजूद यदि कोई अधिकारी अपने पद का इस्तेमाल कथित तौर पर निजी लाभ के लिए करता है, तो यह सिर्फ कानून का उल्लंघन नहीं बल्कि जनता के भरोसे पर भी चोट है।
हालांकि इस मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत की प्रक्रिया के बाद ही होगा। निगरानी ब्यूरो की कार्रवाई और बरामदगी जांच का विषय है तथा आरोपियों को न्यायालय में अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार है।








