

दूसरी बाइक पर शिक्षक का नंबर, चालान भुगत रहे असली मालिक; विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल
खबर जिन्दगी ने उठाए कई ऐसे मामले; लेकिन कार्रवाई के नाम पर विभाग चेतनाशून्य
मुजफ्फरपुर में शिक्षक सौरभ कुमार की परेशानी बरकरार, एक ही वाहन नंबर का दूसरी बाइक पर हो रहा इस्तेमाल; ट्रैफिक डीएसपी ने भी स्वीकार किया है कि गलत चालान कटा है और निरस्तीकरण का मामला प्रक्रिया में है।
मुजफ्फरपुर: बिहार में यातायात नियमों का पालन कराने और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई करने की जिम्मेदारी ट्रैफिक विभाग की है, लेकिन जब विभाग की गलती से किसी निर्दोष वाहन मालिक का चालान कट जाए तो उसे सुधारने में महीनों लगना व्यवस्था की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
मुजफ्फरपुर में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां एक शिक्षक अपने वाहन के गलत चालान को निरस्त कराने के लिए लंबे समय से सरकारी कार्यालयों का चक्कर लगा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि विभागीय स्तर पर गलती स्वीकार किए जाने के बावजूद अब तक चालान रद्द नहीं हुआ है।
दूसरे वाहन पर इस्तेमाल हो रहा शिक्षक की बाइक का नंबर
मामला मुजफ्फरपुर के गांधी नगर, गोबरसही, खबड़ा निवासी शिक्षक सौरभ कुमार से जुड़ा है। सौरभ कुमार गायघाट प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय दहिया परिसर में शिक्षक के पद पर पदस्थापित हैं। उनके नाम से बजाज पल्सर 150 सीसी बाइक (BR06AQ9211) पंजीकृत है।
शिक्षक का कहना है कि उनके वाहन नंबर पर जो यातायात चालान भेजे जा रहे हैं, जिनमें दिखाई गई बाइक उनकी वास्तविक बाइक नहीं है। चालान के साथ भेजी गई तस्वीरों में दूसरे वाहन पर उनकी बाइक का नंबर प्लेट इस्तेमाल होता दिखाई देता है।
जनवरी 2026 में पहली बार सामने आया मामला
सौरभ कुमार के अनुसार, 17 जनवरी 2026 को उन्हें पहली बार ऐसा चालान प्राप्त हुआ था। उस समय वह अपने विद्यालय में शिक्षण कार्य कर रहे थे। मोबाइल पर प्राप्त चालान की तस्वीर देखने के बाद उन्हें पता चला कि उनके वाहन नंबर का इस्तेमाल किसी अन्य बाइक पर किया जा रहा है।
उन्होंने इस संबंध में यातायात विभाग के वरीय पुलिस उपाधीक्षक को आवेदन देकर जांच और चालान निरस्त करने की मांग की थी। इसके बाद भी 6 मई 2026 को उन्हें इसी तरह का एक और चालान प्राप्त हुआ। शिक्षक ने बताया कि उस दिन वह जनगणना संबंधी कार्य के लिए गायघाट में अपने कार्यक्षेत्र में मौजूद थे।
स्थानीय थाने में भी दर्ज कराई आपत्ति



मामला न सुधारता देख शिक्षक ने मुजफ्फरपुर के मिठनपुरा थाना को भी अपनी गाड़ी के नंबर प्लेट की दुरूपयोग की जानकारी दी। साथ ही इस बात का भी उल्लेख किया कि अगर मेरी गाड़ी के नंबर की दूसरी गाड़ी से घटना होती है तो इसका जिम्मेवार मुझे न ठहराया जाये। इसके बावजूद धरातल पर कोई सुधारात्मक कार्रवाई होते नहीं दिखा तो शिक्षक ने बिहार सरकार के सहयोग पोर्टल में शिकायत दर्ज कराई
सहयोग पोर्टल पर विभाग ने मानी अपनी गलती
लगातार गलत चालान मिलने के बाद शिक्षक ने सहयोग पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई। शिकायत की जांच के दौरान विभागीय कर्मचारी ने माना कि संबंधित वाहन का चालान गलत जारी हुआ है। इसके बाद कर्मचारी ने अपनी टिप्पणी के साथ मामला ट्रैफिक डीएसपी को अग्रसारित कर दिया।
29 अगस्त को राज्य परिवहन आयुक्त को भेजा गया पत्र
शिकायत पर कार्रवाई करते हुए ट्रैफिक डीएसपी ने 29 अगस्त को चालान निरस्तीकरण के लिए राज्य परिवहन आयुक्त, परिवहन विभाग, बिहार, पटना को पत्र भेजा। लेकिन शिक्षक के मुताबिक, पत्र भेजे जाने के लगभग दो महीने बाद भी चालान निरस्त नहीं किया गया है।
इस संबंध में ट्रैफिक डीएसपी ने खबर जिन्दगी के संवाददाता से फोन पर बातचीत में मामला प्रक्रिया में होने की बात स्वीकार की है।
ट्रैफिक विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब विभागीय कर्मचारी गलत चालान की पुष्टि कर चुके हैं और ट्रैफिक डीएसपी भी निरस्तीकरण के लिए राज्य स्तर पर पत्र भेज चुके हैं, तो फिर कार्रवाई पूरी होने में इतनी देरी क्यों हो रही है?
वाहन नंबर के कथित दुरुपयोग को रोकने के लिए भी अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं, यह स्पष्ट नहीं है। यदि किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा लगातार एक ही नंबर का इस्तेमाल किया जा रहा है, तो भविष्य में इस नंबर से जुड़े अन्य चालान और कानूनी परेशानियों का सामना भी वास्तविक वाहन मालिक को करना पड़ सकता है।
सौरभ कुमार का कहना है कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आवेदन दिया, वाहन की आरसी, वास्तविक बाइक की तस्वीर और गलत चालान के दस्तावेज भी उपलब्ध कराए। इसके बावजूद उन्हें अब तक राहत नहीं मिली है। आखिर गलत चालान निरस्त करने और वाहन नंबर के दुरुपयोग पर रोक लगाने की जिम्मेदारी किसकी है?
यह मामला केवल एक शिक्षक के गलत चालान का नहीं बल्कि शहर में कई ऐसे केस को खबर जिन्दगी ने उजागर किया है और ट्रैफिक DSP से व्यक्तिगत मुलाकात कर उन्हें बताई है,लेकिन अबतक कोई कार्रवाई होती नहीं दिख रही है। जब विभाग अपनी गलती स्वीकार कर चुका है, तब सुधारात्मक कार्रवाई में देरी आम नागरिकों के भरोसे को प्रभावित करती है।
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