छोटे स्टेशनों ने बढ़ाया पूर्व मध्य रेल का मान, कर्मचारियों ने उठाया महाप्रबंधक से संवाद न होने का सवाल
पूर्व मध्य रेल के विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार 2026 समारोह में बिहार के नरकटियागंज और राजगीर स्टेशनों को स्वच्छता के लिए सम्मानित किया गया। वहीं कर्मचारियों ने महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह से मुलाकात नहीं होने और स्थानांतरण संबंधी समस्याओं को लेकर नाराजगी जताई। पढ़ें पूरी खबर।
पटना, 7 अगस्त 2026: 71वां रेल सप्ताह के अवसर पर शुक्रवार के दिन पूर्व मध्य रेल के लिए दो अलग-अलग तस्वीरें लेकर आया। एक ओर बिहार के नरकटियागंज और राजगीर जैसे अपेक्षाकृत छोटे स्टेशनों ने स्वच्छता के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर पूरे जोन का नाम रोशन किया, वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों के एक वर्ग में इस बात को लेकर नाराजगी है कि महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह को पीड़ित रेलकर्मियों से मिलने का अवसर तक नहीं मिल रहा।

पाटलिपुत्र रेल परिसर, दीघा (पटना) में आयोजित विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार-2026 समारोह में महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह ने उत्कृष्ट कार्य करने वाले 95 अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सम्मानित किया। साथ ही विभिन्न विभागों और मंडलों को 56 दक्षता एवं सर्वांगीण दक्षता शील्ड भी प्रदान की गई।
छोटे स्टेशनों ने जीता स्वच्छता का सम्मान
समारोह की सबसे बड़ी उपलब्धियों में बिहार के दो स्टेशनों का सम्मान रहा। मध्यम श्रेणी के स्टेशनों में नरकटियागंज स्टेशन और छोटे स्टेशनों की श्रेणी में राजगीर स्टेशन को स्वच्छता शील्ड प्रदान की गई। यह सम्मान दिखाता है कि सीमित संसाधनों के बीच छोटे स्टेशन भी बेहतर प्रबंधन और कर्मचारियों की मेहनत से स्वच्छता के नए मानक स्थापित कर सकते हैं।

इसके अलावा बड़े स्टेशनों की श्रेणी में डीडीयू जंक्शन को स्वच्छता शील्ड मिली, जबकि जन शिकायत निवारण में समस्तीपुर और सोनपुर मंडल को संयुक्त रूप से सम्मानित किया गया।
महाप्रबंधक ने की कर्मचारियों की मेहनत की सराहना
अपने संबोधन में महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह ने कहा कि पूर्व मध्य रेल ने चालू वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में यात्री सुविधाओं, सुरक्षा, आधारभूत संरचना और राजस्व वृद्धि के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की हैं। उन्होंने कहा कि इन सफलताओं का श्रेय कर्मचारियों की मेहनत, निष्ठा और टीम भावना को जाता है तथा कर्मचारी कल्याण उनकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

सम्मान के बीच कर्मचारियों की नाराजगी
हालांकि समारोह के समानांतर कर्मचारियों के एक वर्ग में असंतोष भी देखने को मिला। कर्मचारियों का कहना है कि बड़ी संख्या में रेलकर्मी अपनी वरीयता छोड़कर देश के विभिन्न हिस्सों से सोनपुर मंडल और हाजीपुर मुख्यालय में स्थानांतरण लेकर आए, ताकि वे अपने बुजुर्ग माता-पिता के साथ रह सकें और उनका सहारा बन सकें।

लेकिन कर्मचारियों का आरोप है कि स्थानांतरण के बावजूद आज भी कई रेलकर्मी अपने घरों से 200 से 250 किलोमीटर दूर विभिन्न स्टेशनों पर कार्य करने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि इस समस्या के समाधान के लिए वे महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह से मिलकर अपनी बात रखना चाहते थे, लेकिन उन्हें मिलने का समय नहीं दिया गया और उनका आग्रह स्वीकार नहीं किया गया।
कर्मचारियों का मानना है कि यदि कर्मचारी कल्याण वास्तव में सर्वोच्च प्राथमिकता है, तो ऐसे मामलों में संवाद स्थापित कर व्यावहारिक समाधान तलाशा जाना चाहिए।

दो तस्वीरों के बीच बड़ा सवाल
एक ओर जहां छोटे स्टेशनों को स्वच्छता और कर्मचारियों के उत्कृष्ट कार्य को सम्मानित किया गया, वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों के एक वर्ग की शिकायत है कि उनकी महीनों पुरानी स्थानांतरण और पदस्थापन संबंधी समस्याएं अब भी अनसुनी हैं। इसके लिए कर्मचारियों ने परिवार संग हड़ताल तक किए लेकिन महाप्रबंधक के कानों पर जूं तक नहीं रेंगा। इस बीच कई बार महाप्रबंधक से मिल कर अपनी समस्या बतानी चाही लेकिन उन्हें मुलाकात का वक्त तक नहीं दिया गया।
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मान के साथ-साथ कर्मचारियों की व्यक्तिगत और मानवीय समस्याओं पर भी समान संवेदनशीलता दिखाई जाएगी? यदि कर्मचारी नेतृत्व से संवाद ही नहीं कर पाएंगे, तो कर्मचारी कल्याण से जुड़े दावों को जमीन पर उतारना बड़ी चुनौती बना रहेगा।
डिस्क्लेमर: कर्मचारियों द्वारा महाप्रबंधक से मुलाकात नहीं हो पाने और स्थानांतरण संबंधी असंतोष के दावे संबंधित कर्मचारियों के पक्ष पर आधारित हैं। इस संबंध में रेलवे प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।










