जनकल्याण संवाद ने ठंडी में बिहार का पारा किया गर्म..मंत्री की सख्ती से अधिकारी त्रस्त

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सरकार के अधिकारी चाहते हैं कि सरकार जो कर रही है वो बंद किया जाए और ये सारी मांग सरकार से ही की जा रही है।बिहार में एक अजब टाइप का अलग ही खेल चल रहा है।

अभी हम बात कर रहे है उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री विजय कुमार सिन्हा की। बिहार के डिप्टी सीएम ने पटना से भूमि सुधार जनकल्याण संवाद की शुरुआत की। लेकिन मुजफ्फरपुर के जनकल्याण संवाद के बाद सरकार के अधिकारियों के और ही बदलने लगे। जिस सरकारी नौकरी के लिए पढ़ाई और मेहनत कर सरकार के अधिकारी बने उसी सरकार ने कहा कि अब काम कर लो तो ये सरकार के ही खिलाफ हो गए।

मुजफ्फरपुर में विजय कुमार सिन्हा के समर्थन में जुलूस

असल में बिहार में भूमि विवाद सबसे गहरा और बड़ा विवाद है। इसको लेकर आपसी और रिश्तेदारी विवाद में कई हत्याएं तक हो चुकी हैं। लेकिन अबतक कोई इसको देखने वाला नहीं था। अब जबकि 2025 में फिर से  नीतीश कुमार की सरकार बनी तो नीतीश का संभवतः यही सबसे बड़ा एजेंडा है। इसके लिए फायरब्रांड नेता बीजेपी विधायक विजय कुमार सिन्हा को उपमुख्यमंत्री के साथ राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का मंत्री भी बनाया गया। विजय कुमार सिन्हा लखीसराय से जीतकर आए हैं और मतदान के दिन का उनका वीडियो सबने देखा होगा कि कैसे कांग्रेस के छुटभैये नेता ने उनके ऊपर हमला किया था और उसके बाद का परिणाम भी।

अब हम अभी के घटनाक्रम पर आते हैं। मुजफ्फरपुर के भूमि सुधार जनकल्याण संवाद के बाद बिहार राजस्व सेवा संघ (बिरसा) से जुड़े अधिकारी और कर्मचारियों ने सरकार से अपील की कि विजय सिन्हा के द्वारा जो जनकल्याण संवाद कराई जा रही है उससे बंद किया जाए।

दरअसल विवाद बस भर इतना है कि उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा जहां भी यह कार्यक्रम कर रहे हैं वहां पूरे लावलश्कर के साथ संवाद कर रहे हैं जिसमें अंचलाधिकारी और कर्मचारी का होना अनिवार्य है। जिस भी पीड़ित व्यक्ति की समस्या को विजय सिन्हा सुन रहे हैं उसके कर्मचारी को उसके सामने बैठा दे रहे हैं। और यहीं पर अंचलाधिकारी और कर्मचारी की पोलपट्टी खुल जा रही है कि बिना धन के ये सब काम करने को तैयार नहीं हैं या फिर दूसरी पार्टी से जमीन के दाखिल खारिज और परिमार्जन के लिए पैसे खा चुके है रिश्वत के नाम पर। कईयों के सबूत सिन्हा जी को मिले तो उन्होंने तत्काल प्रभाव से उस कर्मचारी या अधिकारी को निलंबित कर दिया। और यही सबसे बड़ा टंटा है जिसे संघ के द्वारा यह कहा जा रहा है कि विजय सिन्हा ऑन द स्पॉट बेइज्जत कर रहे हैं। तो अरे रिश्वतखोरों, जब तुम अधिकारी होकर मुंह खोल कर रिश्वत के नाम पर भीख मांगते हो तब शर्म नहीं आती। जबकि सरकार तुम्हे एक मोटा वेतन तुम्हे घर चलाने के लिए देती है।

बहरहाल आगे क्या होगा पता नहीं पर चलते चलते एक कहावत तो इन सरकारी अधिकारी और कर्मचारियों के लिए तो बनता है कि “सरकार ऑफिस आने-जाने के लिए वेतन देती है लेकिन काम करने के लिए धन तो आम जनता की तरफ से ही आता है, जिसको अस मेहनताना भी कहा जाता है।” हम आप आमजनता ही हैं जो सरकार के लिए वोट उगाही और सरकारी कर्मचारी के लिए धन उगाही का साधन बने हुए हैं।

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Sandeepak Kumar
Author: Sandeepak Kumar

संदीपक कुमार, पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 साल से अधिक का अनुभव। ई टीवी से कैरियर की शुरुआत की। महुआ, कशिश न्यूज़,न्यूज 29 जैसे चैनल में बतौर पैनल प्रोड्यूसर और पीसीआर हेड के तौर पर काम किया। रायपुर आईबीसी 24, चंडीगढ़ न्यूज 18 में सीनियर प्रोड्यूसर कार्यरत रहे। कंटेंट डिजायनर के साथ ही स्क्रिप्ट राइटिंग, पैनलिंग और डिजिटल में कार्य का भी अनुभव रहा है।

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