Amerika-iran War: पिछले एक महीने से चला आ रहा अमेरिका ईरान युद्ध अब संभवत अपने अंतिम चरण है। इस बात का अंदेशा अमेरिका के सैनिकों की वापसी के लिए समय सीमा निश्चित किए जाने के बाद लगाई जा रही है। लेकिन दो सवाल..क्या अमेरिका खुद ही युद्ध खत्म करने को तैयार है ? और दूसरा, अमेरिका NATO से अलग हो जाएगा ??
अमेरिका के द्वारा वर्चस्व की लड़ाई में ईरान को शिकस्त देने की बात अब बेमानी सी लगती है। अमेरिका जितने हमले कर रहा उतने ही हमले ईरान की तरफ से भी किया जा रहा हैं। इस युद्ध में हजारों जाने अब तक जा चुकी है और अरबों डॉलर का नुकसान तक हो चुका है। इसके बावजूद यह युद्ध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा।
अब अमेरिका द्वारा अपने सैनिकों की वापसी की समय सीमा तय करने से इस बात पर मुहर लगती दिख रही है कि यह युद्ध जल्द खत्म होगा। अमेरिका ने तय किया है कि 2-3 हफ्ते में सैनिकों की वापसी शुरू हो जाएगी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ट्रंप ने कहा है कि ईरान शर्तों को माने या न माने, लेकिन हम ये युद्ध जल्द खत्म करना चाहते हैं।
दरअसल यह युद्ध जब शुरू हुआ था तो शुरुआती चरण में ही अमेरिका ने ईरान के सर्वोच्च नेता ख़ामेनेई के कार्यालय पर मिसाइल गिराया। जिसमें ख़ामेनेई की मौत हो गई। तब अमेरिका को लगा था कि अब यह युद्ध खत्म हो जाएगा लेकिन ईरान ने अपने सर्वोच्च नेता की मृत्यु पर शोक करने के बजाय उल्टा अमेरिका के ठिकानों पर बम बरसाने शुरू कर दिए। ईरान ने अपने पड़ोसी देशों में स्थित अमेरिका के युद्ध बेसों पर मिसाइल मार सारे बेस को तबाह कर दिया, और हॉर्मूज स्ट्रेट को बंद कर दिया।
ईरान की इस कार्रवाई से अमेरिका ने NATO देशों से मदद मांगी लेकिन कोई भी अमेरिका की सहायता के लिए नहीं आया। इसके बाद ट्रंप खिसिया गए और उन्होंने NATO से खुद को अलग करने की धमकी दी। इस युद्ध को खत्म करने के पहले राष्ट्र के नाम संदेश में डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के तेल ठिकानों को नष्ट करने और ईरान को पाषाण युग में भेजने की चेतावनी दी है। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि ईरान से युद्ध सत्ता परिवर्तन के लिए नहीं था। तो बड़ा सवाल यहां यह उठता है कि ईरान के ऊपर यह युद्ध तेल के लिए थोपा गया था!
अब तो आने वाले हफ्तों में ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह युद्ध किस कारण से लड़ा गया और अमेरिका के साथ साथ विश्व पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।










