अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप जाते जाते पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को रसातल में पहुंचाकर ही मानेगा। लेबनान पर इजराइल के ताजा हमलों से ईरान ने “बाब अल-मंदेब” को भी बंद करने की चेतावनी दे दी है। जिसके बाद भारत में पेट्रोलियम उत्पादों के दाम में फिर से बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

BHARAT: भारत में फिर पेट्रोलियम उत्पादों जैसे पेट्रोल डीजल और गैस के दाम फिर से बढ़ने के आसार बढ़ गए हैं। सूत्रों के हवाले से जो खबर निकल कर आ रही है उसके अनुसार भारत सरकार जल्द ही पेट्रोल और डीजल के दाम में लगभग 2 रुपए और गैस सिलेंडर पर 30 रुपए इजाफा होने की संभावना है। भारत सरकार ने अभी 1:30 रुपए पेट्रोल पर अपना टैक्स कम किया है इसके बावजूद पेट्रोलियम कंपनियों को लगभग 30 रुपए का घाटा लग रहा है। वही ATF(Aviation Turbine Fuel) यानी विमानों में जिस ईंधन का इस्तेमाल हो रहा है उस पर भी कंपनियों को काफी वित्तीय नुकसान हो रहा है। इनकी माने तो गैस सिलेंडर पर कंपनियों को लगभग 650 रुपए का घाटा उठाना पड़ रहा है।
बाब अल-मंदेब: इधर ईरान मुसीबतो की पहाड़ तोड़ने को तैयार बैठा है। हॉर्मूज स्ट्रेट वे के बंद होने के बाद लेबनान पर हो रहे इजरायली हमले के बाद ईरान ने “बाब अल-मंदेब” को बंद करने की चेतावनी दी है जिसके बाद पेट्रोलियम बाजार में हाहाकार मच गया है। “बाब अल-मंदेब” यमन के पास लाल सागर और अदन की खाड़ी के बीच स्थित एक बहुत ही संकरा और जलडमरूमध्य है जो ईरान से सहायता प्राप्त हुती का प्रभाव क्षेत्र माना जाता है। यह एशिया, यूरोप और अफ्रीका के बीच होने वाले वैश्विक व्यापार का मुख्य द्वार है। हुती यही रहते हैं जिन्हें ईरान की तरफ से हर तरीके से मदद मिलता है। और अगर यह रास्ता भी बंद हो गया व्यावसायिक गतिविधियों पर खर्च 50 फीसदी के आसपास बढ़ने की संभावना है। क्योंकि इसके इन देशों के बीच व्यापार का एक मात्र रास्ता बचेगा और वो है “केप ऑफ गुड हॉप“
केप ऑफ गुड हॉप: अफ्रीकी देशों से व्यापार इसी समुद्री रास्ते से होता है। लेकिन “बाब अल-मंदेब” के बंद होने के बाद भारत का यूरोपियन देशों से “केप ऑफ गुड हॉप” के रास्ते ही व्यवसायिक गतिविधियां संभव हो पाएगी। इस रास्ते से व्यापार करने से समय के साथ साथ ईंधन पर लगात बढ़ेगी और सामानों पर महंगाई का मार पड़ेगा। इस मार्ग का भारत से बहुत गहरा संबंध है जब पुर्तगाली खोजकर्ता वास्को द गामा 1498 में इसी मार्ग से भारत (कालीकट) पहुंचा था।
डोनाल्ड ट्रंप की कारिस्तानी
बहरहाल ट्रंप ने सत्ता में आने के बाद एक भी कोई ऐसा काम नहीं किया जिससे विश्व को कोई फायदा हुआ हो। पहले तो नोबेल पुरस्कार के लिए हंगामा, उसके बाद विश्व पर टैरिफ की मार फिर दूसरे देशों के राज्याध्यक्ष पर शिकंजा और उसके बाद ईरान के साथ युद्ध से इसने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को रसातल में पहुँचा दिया है।
बहरहाल अब यह देखना होगा कि भारत इन सब परिस्थितियों से कैसे निपटता है। क्यूंकि भारत पेट्रोलियम उत्पादों के लिए पूरी तरह से विश्व पर ही निर्भर है और अगर यह तनातनी नहीं रुकी तो एक बड़ी समस्या उत्पन्न हो सकती है।










