भारत से 2030 तक एक सभ्यता खत्म होने जा रही है।10000 की आबादी के इस समुदाय का नाम भारत के इतिहास के पन्नों में ही मिलेगा। यह समुदाय फिलहाल भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में रह रहा है। जिसमें से 2 दशकों में लगभग 3000 की आबादी का मानचित्र बदल चुका है बाकी के लगभग 7000 लोगों की आबादी भी अगले 4 सालों में भारत से खत्म हो जाएगी। यहां हम बात कर रहे हैं बेनी मेनाशे समुदाय की

इस आबादी का इतिहास
मौखिक लोककथाओं के अनुसार, सदियों पहले लगभग 720 ईसा पूर्व असीरियन साम्राज्य द्वारा कानन(आधुनिक इजराइल) पर अधिकार के बाद यहूदियों की ‘मनस्से’ सभ्यता को निर्वासित कर दिया गया। जिसके बाद इनके वंशज में से एक बेनी मेनाशे फारस, अफगानिस्तान, तिब्बत और चीन से होते हुए भारत पहुंच पूर्वोत्तर के राज्यों में बस गए।
पूर्वोत्तर में किस राज्य में बसे
भारत आने के बाद बेनी मेनाशे पूर्वोत्तर भारत के मिजोरम और मणिपुर राज्यों में रहने लगे। लेकिन इन्होंने कभी भी अपने को इजराइल से अलग नहीं समझा और इन्होंने खुद को भारतीय यहूदियों का एक समूह के रूप में विकसित रखा है। लगभग 10,000 लोगों का यह समुदाय खुद को बाइबिल में उल्लिखित इज़राइल की दस खोई हुई जनजातियों में से एक, ‘मनस्से’ का वंशज मानता है।
भारत से इस सभ्यता के खत्म होने के कारण
सदियों से यह सभ्यता खुद में प्राचीन इसरायली रीति रिवाजों को संरक्षित रखा है। 20वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में यहूदी संगठनों के संपर्क के बाद कई परिवारों ने मुख्यधारा के यहूदी धर्म को अपनाया और इजरायल में बसने की मांग की। इजरायली रब्बीनेट ने उनके दावों को मान्यता दी है, हालांकि नए सदस्यों को औपचारिक धर्मांतरण प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। पिछले दो दशकों में हजारों बेनी मेनाशे पहले ही इजरायल पहुंच चुके हैं और देश के विभिन्न हिस्सों में बस गए हैं।
बेनी मेनाशे समुदाय का स्थानांतरण
दरअसल इसराइली प्रधानमंत्री ने भारत के पूर्वोत्तर राज्यों मणिपुर और मिजोरम में बसे बेनी मेनाशे समुदाय को 4 साल के अंदर यानी 2030 तक वापस इजराइल लाने की घोषणा की है। जिसके बाद बताया जा रहा है कि सरकार की इस योजना के तहत भारत में रह रहे बेनी मेनाशे समुदाय के लगभग 6000 शेष सदस्यों को क्रमबद्ध तरीके से सुरक्षित इजरायल पहुंचाया जाएगा। 2026 की शुरुआत से अब तक करीब 600 सदस्य इजरायल पहुंच चुके हैं, जबकि दिसम्बर तक और 600 सदस्यों के इजराइल पहुंचने की उम्मीद है। अब तक हो रहे प्रयासों में कोई विघ्न नहीं आई तो 2030 के अंत तक समुदाय का लगभग पूरा हिस्सा इजरायल पहुंच जाएगा।
इजराइल में “तावोर अवशोषण केंद्र” का उद्घाटन
इस नई पहल के तहत इजराइल के शहर नोफ हगालिल में ‘तावोर अवशोषण केंद्र’ (Tavor Absorption Center) का औपचारिक उद्घाटन किया गया। यह केंद्र नए प्रवासियों को हिब्रू भाषा, सामाजिक सेवाएं, रोजगार, शिक्षा और सामुदायिक एकीकरण की पूरी सुविधा प्रदान करेगा। इज़राइल सरकार में प्रवासी और एकीकरण मंत्री ओफिर सोफर ने कहा कि यह केंद्र कई परिवारों की लंबे समय से चली आ रही आकांक्षा को पूरा करेगा। सरकार इन नए इजरायलियों को स्थिर और सम्मानजनक जीवन स्थापित करने में हर संभव मदद देगी। यह केंद्र यहूदी एजेंसी फॉर इजराइल के सहयोग से संचालित हो रही है।
बेनी मेनाशे समुदाय का यह प्रवास भारत और इजरायल के बीच एक अनोखा मानवीय व सांस्कृतिक सेतु साबित हो रहा है, जो दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच विश्वास और साझेदारी को और मजबूत करेगा।










