नई दिल्ली: वैश्विक तेल बाजार में सऊदी अरब ने ऐसा फैसला लिया है जिसने पूरी ऑयल इंडस्ट्री का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको ने एशियाई ग्राहकों के लिए अगस्त 2026 से प्रभावी अपने प्रमुख अरब लाइट क्रूड की कीमत में 11 डॉलर प्रति बैरल तक की कटौती का ऐलान किया है। इसे पिछले दो दशकों में सबसे बड़ी मूल्य कटौतियों में से एक माना जा रहा है।
सऊदी अरामको द्वारा जारी मूल्य निर्धारण दस्तावेज के अनुसार, अगस्त डिलीवरी के लिए एशियाई खरीदारों को अरब लाइट क्रूड क्षेत्रीय बेंचमार्क के मुकाबले 1.50 डॉलर प्रति बैरल की छूट पर मिलेगा। बाजार विशेषज्ञ जहां 7-8 डॉलर प्रति बैरल तक कटौती की उम्मीद कर रहे थे, वहीं सऊदी ने उससे कहीं अधिक राहत देकर बाजार को चौंका दिया।
क्यों लिया गया यह फैसला?
विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की मांग कमजोर पड़ने और मध्य पूर्व में तनाव कम होने के कारण तेल की आपूर्ति सामान्य हो गई है। हाल ही में इजरायल-ईरान संघर्ष के दौरान कच्चे तेल की कीमतें 80-85 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, लेकिन हालात सामान्य होने के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 72 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है।
इसके साथ ही, ओपेक प्लस देशों द्वारा अगस्त से उत्पादन बढ़ाने के फैसले ने भी बाजार में तेल की उपलब्धता बढ़ा दी है। इससे एशियाई बाजार में प्रतिस्पर्धा तेज होगी और कीमतों पर दबाव बना रहेगा।
भारत को क्या होगा फायदा?
भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है और सऊदी अरब उसके प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है। ऐसे में इस मूल्य कटौती का सीधा लाभ भारत को मिल सकता है।
आर्थिक जानकारों का मानना है कि इससे भारत का आयात बिल कम होगा, चालू खाता घाटा (CAD) पर दबाव घटेगा, रुपये को मजबूती मिल सकती है और विदेशी मुद्रा भंडार पर बोझ कम होगा। यदि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में नरमी बनी रहती है तो आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी राहत मिलने की संभावना बढ़ सकती है। साथ ही महंगाई नियंत्रित करने और तेल विपणन कंपनियों के मुनाफे में सुधार की भी उम्मीद जताई जा रही है।
हालांकि, पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों में कमी कई अन्य कारकों—जैसे टैक्स, विपणन मार्जिन और सरकारी नीतियों—पर भी निर्भर करेगी। इसलिए राहत की संभावना तो मजबूत हुई है, लेकिन कीमतों में तत्काल कटौती की कोई आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है।









