2.5 प्रतिशत से भारत को दहलाने की कोशिश ; खुलासे से शुरू हो गई एक नई बहस

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जकात के नाम पर टेरर फंडिंग का नेटवर्क! पूर्व आतंकी मुश्ताक अहमद के दावे, NIA जांच में भी कई संगठनों पर गंभीर आरोप

पूर्व आतंकी के खुलासों और NIA की जांच में कश्मीर में जकात, हवाला और कथित फर्जी NGOs के जरिए आतंकवाद को फंडिंग मिलने के आरोप; सुरक्षा एजेंसियां लगातार कर रही कार्रवाई।

नई दिल्ली/श्रीनगर। कश्मीर में धार्मिक चंदे ‘जकात’ के कथित दुरुपयोग और आतंकवाद की फंडिंग को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। पूर्व आतंकी मुश्ताक अहमद भट ने एक पॉडकास्ट में दावा किया है कि 1990 और 2000 के दशक में जकात, विदेशी चैरिटी और हवाला नेटवर्क के जरिए बड़ी मात्रा में धन आतंकवादी गतिविधियों तक पहुंचाया जाता था। वहीं, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) भी पिछले कुछ वर्षों में कई एनजीओ और ट्रस्टों के खिलाफ टेरर फंडिंग से जुड़े मामलों की जांच कर रही है।

मुश्ताक अहमद भट, जो कभी हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़ा रहा और बाद में भारतीय सेना की 162 TA बटालियन के साथ काम करने का दावा करता है, ने कहा कि इस्लाम में जकात का उद्देश्य गरीबों, बीमारों और जरूरतमंदों की सहायता करना है। हालांकि, उसके अनुसार कुछ अलगाववादी और आतंकी संगठनों ने इस धार्मिक व्यवस्था का कथित रूप से दुरुपयोग कर धन को आतंकवाद की ओर मोड़ दिया।

भट ने दावा किया कि विदेशी देशों से आने वाली चैरिटी, जकात और अन्य आर्थिक सहायता का बड़ा हिस्सा हवाला नेटवर्क के माध्यम से आतंकी संगठनों और उनके ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGWs) तक पहुंचाया जाता था। उसके अनुसार यह धन हथियार खरीदने, अलगाववादी गतिविधियों, पत्थरबाजी और आतंकियों के नेटवर्क को मजबूत करने में इस्तेमाल होता था।

उसने यह भी आरोप लगाया कि 1990 के दशक में कश्मीर में सक्रिय कई आतंकी संगठनों ने स्थानीय व्यापारियों और आम नागरिकों से जबरन चंदा वसूला। फंडिंग को लेकर विभिन्न आतंकी गुटों के बीच संघर्ष और गैंगवार भी हुए।

इधर, NIA ने हाल के वर्षों में जम्मू-कश्मीर में कथित टेरर फंडिंग से जुड़े कई मामलों में कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने फलाह-ए-आम ट्रस्ट, जेके यतीम फाउंडेशन, JKCCS तथा अन्य संगठनों से जुड़े मामलों की जांच की है। एजेंसी का आरोप है कि विदेशी फंड और चैरिटी के नाम पर प्राप्त धन का इस्तेमाल अलगाववादी गतिविधियों और आतंकवाद को बढ़ावा देने में किया गया। इन मामलों में जांच और न्यायिक प्रक्रिया जारी है।

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक दान और विदेशी चैरिटी के उपयोग में पारदर्शिता, सख्त ऑडिट और वित्तीय निगरानी आवश्यक है ताकि किसी भी प्रकार के दुरुपयोग को रोका जा सके। उनका कहना है कि वास्तविक जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाने के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है।

Khabar Jindagi
Author: Khabar Jindagi

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