मुजफ्फरपुर/आगरा: बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बावजूद तस्कर नए-नए हथकंडे अपनाकर कानून को चुनौती दे रहे हैं। उत्तर प्रदेश के आगरा में पुलिस ने एक ऐसे अंतरराज्यीय शराब तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसने इंसानों की जान बचाने वाली एंबुलेंस को ही शराब तस्करी का जरिया बना दिया। सायरन बजाती एंबुलेंस के अंदर मरीज नहीं, बल्कि 80 पेटी अंग्रेजी शराब भरी हुई थी, जिसकी खेप बिहार के पूर्वी चंपारण पहुंचाई जानी थी।
पुलिस के अनुसार, तस्करों ने एंबुलेंस के आगे बिहार नंबर की एक थार को पायलट वाहन बनाया था, ताकि रास्ते में किसी को शक न हो। सायरन बजते ही बैरियर खुल जाते थे और पुलिस भी इसे गंभीर मरीज ले जा रही एंबुलेंस समझकर आगे बढ़ा देती थी।
डीसीपी पश्चिम आदित्य सिंह ने बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर यमुना एक्सप्रेसवे के पास एंबुलेंस को रोका गया। तलाशी में करीब 10.50 लाख रुपये मूल्य की 80 पेटी अंग्रेजी शराब बरामद हुई। पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे इससे पहले चार खेप सुरक्षित बिहार पहुंचा चुके थे और यह पांचवीं खेप थी। पुलिस से बचने के लिए उन्होंने विशेष रूप से एंबुलेंस खरीदी थी। एक्सप्रेसवे पर पहुंचते ही एंबुलेंस पर प्रयागराज का नंबर लगाया जाता था, जबकि आगे बिहार नंबर की थार चलती थी।
बिहार सरकार के लिए बड़ा सवाल
बिहार में वर्षों से पूर्ण शराबबंदी लागू है, लेकिन इस कार्रवाई ने फिर साबित कर दिया कि शराब माफिया लगातार नए तरीके अपनाकर राज्य में शराब पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवा का दुरुपयोग न केवल कानून के साथ धोखा है, बल्कि यह मानवता और स्वास्थ्य व्यवस्था के प्रति भी गंभीर अपराध है।
अब सवाल यह है कि जब तस्कर एंबुलेंस तक का इस्तेमाल करने लगे हैं, तो क्या अंतरराज्यीय सीमाओं पर निगरानी और सख्त करने की जरूरत नहीं है? क्या शराबबंदी को प्रभावी बनाने के लिए राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और हाईवे पर उन्नत जांच व्यवस्था समय की मांग बन चुकी है?
पुलिस ने हरियाणा के सोनीपत और जींद के पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर आबकारी अधिनियम और धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं में जेल भेज दिया है। उनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।







