सोनम वांगचुक के अलावा 3 और पीएचडी स्कॉलर छात्र हैं 22 दिनों से भूख हड़ताल पर..मेडिकल टीम कर रही है निगरानी
नई दिल्ली। शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और पेपर लीक के मुद्दे पर 20 जुलाई को संसद मार्च के बीच पिछले 23 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त करने के संकेत दिए हैं। हालांकि, उनके ताज़ा पत्र में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग का कोई उल्लेख नहीं है, जिससे राजनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है।
वांगचुक ने 19 जुलाई को अस्पताल से लिखे एक हस्तलिखित पत्र में कहा कि यदि सरकार उनकी तीन प्रमुख शर्तें मान लेती है, तो वह तुरंत अपना अनशन समाप्त कर देंगे। इससे पहले उनका आंदोलन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर केंद्रित रहा था।
क्या हैं वांगचुक की तीन शर्तें?
वांगचुक ने अनशन समाप्त करने के लिए सरकार के सामने तीन शर्तें रखी हैं—
1. सरकार हालिया पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था की विफलताओं की जिम्मेदारी स्वीकार करे।
2. उन्हें और आंदोलन के प्रतिनिधियों को संसद पहुंचने दिया जाए, जहां विभिन्न दलों के सांसद मानसून सत्र में शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक का मुद्दा उठाने का सार्वजनिक आश्वासन दें।
3. किसी प्रमुख राजनीतिक दल का शीर्ष नेता अस्पताल पहुंचकर उनसे मुलाकात करे और मांगों पर सकारात्मक आश्वासन दे।
इन शर्तों में कहीं भी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग शामिल नहीं है।
संसद मार्च आज, आंदोलन जारी रखने का ऐलान
वांगचुक की ओर से अनशन खत्म करने के संकेत मिलने के बावजूद, आंदोलन से जुड़े संगठन CJP ने स्पष्ट किया है कि उनकी मूल मांगें बदली नहीं हैं। संगठन का कहना है कि शिक्षा मंत्री से जवाबदेही तय करने, पेपर लीक से प्रभावित छात्रों को न्याय दिलाने और आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग जारी रहेगी।
इसी के साथ आज संसद मार्च का कार्यक्रम भी जारी है। संगठन ने कहा है कि प्रशासनिक प्रतिबंधों के बावजूद प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से किया जाएगा।
अस्पताल में भर्ती हैं वांगचुक
59 वर्षीय सोनम वांगचुक को शनिवार को दिल्ली पुलिस जंतर-मंतर से अस्पताल ले गई थी। पुलिस का कहना है कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह और अदालत के निर्देशों के अनुसार उनकी स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए यह कदम उठाया गया। वहीं समर्थकों का आरोप है कि उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध अस्पताल में रखा गया है।
पुलिस सतर्क, शांति बनाए रखने की अपील
संसद मार्च से पहले CJP ने आशंका जताई है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई हो सकती है। संगठन ने दावा किया कि क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और प्रदर्शनकारियों से किसी भी उकसावे में न आने तथा शांतिपूर्ण मार्च निकालने की अपील की गई है।
आज शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र के बीच यह आंदोलन शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और सरकारी जवाबदेही के मुद्दे को लेकर राष्ट्रीय राजनीति का प्रमुख विषय बनता दिख रहा है।







