डॉक्टर की लापरवाही ने ली एक और जान.. मुजफ्फरपुर एसकेएमसीएच का मामला

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जान की कीमत क्या होती है, पूछिए उस मां से जो अपने जवान होते बच्चे को अपनी आंखो के सामने उसे दुनिया से जाते देखती है। कितनी पीड़ादायक अवस्था है एक मां के लिए बयां नहीं किया जा सकता।

एसकेएमसीएच में डॉक्टर की लापरवाही  के कारण एक 20 साल के इलाजरत लड़के की जान चली गई। लड़के की मां के मुताबिक उसे चमकी बुखार हुआ था। जिसके बाद रविवार को SKMCH मुजफ्फरपुर में भर्ती कराया गया। जहां बुधवार की देर शाम उसने दम तोड़ दिया।

शिवहर के सुगियां कंसारी गांव के रहने वाले 20 वर्षीय संतोष कुमार को चमकी बुखार की शिकायत पर एसकेएमसीएच मुजफ्फरपुर में रविवार को भर्ती कराया गया था। बुधवार सुबह 5 बजे उसे सांस लेने में दिक्कत होने लगी। जिसके कारण संतोष को उसकी मां सविता देवी ने दूसरे बेड पर लिटा ऑक्सीजन लगा दिया और डॉक्टर को बुलाने चली गई लेकिन डॉक्टर नहीं मिले।

थोड़ी देर बाद जब डॉक्टर आए तो डॉक्टर और गार्ड ने उल्टा संतोष की मां को फटकार कर ऑक्सीजन वाले बेड से भी से भगा दिया, जबकि लड़के की हालत गंभीर थी। अंत में सविता देवी ने खुद ही संतोष के सीने को अपने हाथों से दबा दबा कर सांस देने की कोशिश करने लगी। सविता देवी के लाख मनुहार के बाद भी डॉक्टर ने संतोष की जांच करना मुनासिब नहीं समझा और अंततः संतोष की मौत हो गई।

अब जिम्मेवार किसे माना जाए! संतोष और उसकी मां की जिसने अच्छे इलाज की आस में खुद का इलाज एसकेएमसीएच में कराना उचित समझा या उस प्रशासन को जो गरीबों को रोज तिल तिल कर मरते देखती है लेकिन उसके लिए होकर भी गरीबों को यह एहसास दिलाती है की तुम सब इसी के लायक हो। एसकेएमसीएच प्रशासन में ऊपर से लेकर नीचे तक के सभी डॉक्टर और स्टाफ संवेदनहीन हो चुके हैं।

Sandeepak Kumar
Author: Sandeepak Kumar

संदीपक कुमार, पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 साल से अधिक का अनुभव। ई टीवी से कैरियर की शुरुआत की। महुआ, कशिश न्यूज़,न्यूज 29 जैसे चैनल में बतौर पैनल प्रोड्यूसर और पीसीआर हेड के तौर पर काम किया। रायपुर आईबीसी 24, चंडीगढ़ न्यूज 18 में सीनियर प्रोड्यूसर कार्यरत रहे। कंटेंट डिजायनर के साथ ही स्क्रिप्ट राइटिंग, पैनलिंग और डिजिटल में कार्य का भी अनुभव रहा है।

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