आखिर कार उमर तक पहुंची कैसे?

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अनसुलझे सवालों में एक सवाल यह भी है कि मोहम्मद उमर तक कार पहुंची तो कैसे पहुंची। पुलिस अपनी तरफ से इस सवाल को सुलझाने में लगी है। इसके लिए सबसे पहले रॉयल कार जोन के प्रोपराइटर अमित पटेल ने क्या कहा उसे समझना पड़ेगा। ये आगे की खबर में बताते हैं।

इससे पहले यह जान लेना जरूरी है कि लालकिला पर जब ये घटना हुई तब प्रधानमंत्री मोदी भूटान की राजकीय यात्रा पर थे। यात्रा समाप्त कर मोदी दिल्ली आकर सबसे पहले LNJP अस्पताल जाते हैं और लालकिला हादसे में घायलों से मिलते हैं, उन्हें ढाढस बंधाते हैं। वही पर मोदी ने इशारा कर दिया था कि करारा प्रहार होगा। उसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय आते हैं, दिल्ली ब्लास्ट को लेकर बुधवार को कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी यानी सीसीएस की अहम बैठक बुलाई जाती है। कैबिनेट की मीटिंग में सरकार ने दिल्ली ब्लास्ट को आतंकी घटना करार दिया और इसे “Act of Terror” माना है। साथ ही सरकार की तरफ से बयान आता है कि “दिल्ली ब्लास्ट के गुनहगारों का हिसाब होगा”।

भारत के कड़े तेवर को देखते हुए पाकिस्तान में भी हड़कंप मचा हुआ है। इसके बाद से पाकिस्तान के वजीर ए आज़म शहबाज शरीफ भी मीटिंग पर मीटिंग कर रहे हैं। ये मीटिंग बुलाकर पाकिस्तान ने एक बार फिर से साबित कर दिया है कि आतंकवाद को बढ़ावा देने और पालने में उसका बड़ा हाथ है। रेल मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने भी ये बात कही है। अब फिर से वापस कार खरीदने की ट्रेजेडी कैसे तय की गई, बताते हैं।

पुलिस के अब तक के खुलासे के अनुसार आतंकियों को एक एक ऐसी गाड़ी चाहिए थी जिसकी खरीदी बिक्री अनेकों बार की गई हो। इन आतंकियों ने ऑनलाइन वेबसाइट का रुख किया। OLX की साइट पर इन आतंकियों को एक पुरानी गाड़ी i20 मिली जो रॉयल कार जोन में सेल के लिए लगी थी जो पुरानी गाड़ियों की खरीद बिक्री करती है। 29 अक्टूबर को आतंकियों में से दो लोग आमिर रशीद अपने एक साथी आतंकी के साथ कार जोन के मालिक अमित पटेल से मिला। 4 बजे तक डील फाइनल होकर पेमेंट भी कर दी जाती है।

इसके साथ अभी अभी जो खबर आ रही है कि मोहम्मद उमर के मां से लिया गया DNA सैंपल i20 कार के अंदर पाए गए शरीर के अवशेष से मैच कर गया है। मतलब अब ये पूरी तरह साफ हो गया है कि लालकिला के पास का विस्फोट आत्मघाती हमला था। मोहम्मद उमर इस विस्फोट में मारा गया है जो खुद ही i20 कार चला रहा था।

कार का इंश्योरेंस था और पॉल्यूशन सर्टिफिकेट(PUC) फेल हो चुका था। जिसे बनवाने के लिए पास के पेट्रोलपंप पर जाकर वहीं से PUC बनवाया जाता है। और यही पर यह कार मोहम्मद उमर को दे दी जाती है। अब सवाल यह उठता है कि खबर तो ये आई थी कि तारिक जो कश्मीर में बैंकों के सुरक्षा की देख-रेख करता था, उसने उमर को कार दी थी। तो क्या आमिर रशीद के साथ कार की खरीदी करते वक्त तारिक साथ में था।

Sandeepak Kumar
Author: Sandeepak Kumar

संदीपक कुमार, पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 साल से अधिक का अनुभव। ई टीवी से कैरियर की शुरुआत की। महुआ, कशिश न्यूज़,न्यूज 29 जैसे चैनल में बतौर पैनल प्रोड्यूसर और पीसीआर हेड के तौर पर काम किया। रायपुर आईबीसी 24, चंडीगढ़ न्यूज 18 में सीनियर प्रोड्यूसर कार्यरत रहे। कंटेंट डिजायनर के साथ ही स्क्रिप्ट राइटिंग, पैनलिंग और डिजिटल में कार्य का भी अनुभव रहा है।

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