सिकंदरपुर लेक फ्रंट का लोकार्पण और कई बड़ी परियोजनाओं की घोषणा
लेकिन क्या अब गली-मोहल्लों का काम भी मुख्यमंत्री के भरोसे?
मुजफ्फरपुर। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार को मुजफ्फरपुर के MIT मैदान में आयोजित नगर विकास एवं आवास विभाग एवं BUIDCO के कार्यक्रम में ₹1,047.09 करोड़ की लागत वाली 982 विकास योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने विशाल जनसभा को संबोधित किया और उत्तर बिहार के विकास को नई दिशा देने का दावा किया।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने ₹213.25 करोड़ की लागत से विकसित सिकंदरपुर लेक फ्रंट का भी लोकार्पण किया। आधुनिक लाइटिंग, आकर्षक फव्वारों, कलाकृतियों, बोट क्लब और सार्वजनिक सुविधाओं से लैस इस परियोजना को मुजफ्फरपुर की नई पहचान के रूप में प्रस्तुत किया गया।
सरकार ने इस अवसर पर मुजफ्फरपुर में आर्किटेक्चर एवं सिविल इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय की स्थापना, तिरहुत टाउनशिप, पटना-मुजफ्फरपुर रैपिड रेल कॉरिडोर, एयरपोर्ट और हल्दिया-रक्सौल हाईवे जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। इन योजनाओं को उत्तर बिहार में शिक्षा, निवेश, रोजगार और बेहतर कनेक्टिविटी की दिशा में बड़ा कदम बताया गया।
किन योजनाओं का हुआ शुभारंभ..
669 योजनाएं मुख्यमंत्री समग्र शहरी विकास योजना के तहत, जिन पर ₹375.04 करोड़ खर्च होंगे। इनमें सड़क, नाली, स्ट्रीट लाइट और सामुदायिक भवन शामिल हैं।
₹213.25 करोड़ की स्मार्ट सिटी परियोजनाओं में सिकंदरपुर लेक फ्रंट, बोट क्लब और अन्य नागरिक सुविधाओं का विकास।
₹233.77 करोड़ की लागत से तीन बड़ी स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज परियोजनाएं, जिनका उद्देश्य शहर को जलजमाव से राहत दिलाना है।
309 अन्य योजनाओं पर ₹225.03 करोड़, जिनमें पार्क, घाट, जलापूर्ति और अन्य शहरी सुविधाओं का विस्तार शामिल है।
उपलब्धियां भी, लेकिन सवाल भी
इतनी बड़ी राशि की विकास योजनाएं निश्चित रूप से मुजफ्फरपुर के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। विशेष रूप से तकनीकी विश्वविद्यालय, ड्रेनेज सिस्टम और लेक फ्रंट जैसी परियोजनाएं शहर के भविष्य को नई दिशा दे सकती हैं।
हालांकि इस कार्यक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में एक सवाल भी उठ रहा है। जब मुख्यमंत्री को शहर की गलियों, नालियों और वार्ड स्तर की योजनाओं तक का उद्घाटन और शिलान्यास करना पड़ रहा है, तो क्या स्थानीय निकाय, नगर निगम, विधायक और सांसद अपनी जिम्मेदारियां प्रभावी ढंग से निभा पा रहे हैं?
अगर गली की सड़कों का उद्घाटन भी मुख्यमंत्री करेंगे, तो फिर स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल उठना लाजिमी है। हालांकि नगर विधायक रंजन कुमार से कुछ दिन पहले जब बात की जा रही थी तो उनका ये कहना था कि शहर में अब भी गलियों और सड़कों की समस्या आम जनता की तरफ से ज्यादा बताई जाती है। दूसरी ओर सरकार का तर्क यह हो सकता है कि बड़े पैमाने पर विकास कार्यों को एक मंच से गति देने और जनता के बीच भरोसा कायम करने के लिए मुख्यमंत्री स्वयं इन परियोजनाओं की शुरुआत कर रहे हैं।
अब असली परीक्षा शिलान्यास और उद्घाटन की नहीं, बल्कि इन योजनाओं के समय पर पूरा होने और जनता तक वास्तविक लाभ पहुंचने की होगी।









