
मुजफ्फरपुर के गोबरसही में सोमवार को हुए भीषण PNG गैस पाइपलाइन विस्फोट ने पूरे शहर को झकझोर दिया था। मकान तबाह हुए, वाहन क्षतिग्रस्त हुए और कई लोग हादसे की चपेट में आए। लेकिन इस घटना के महज दो दिन बाद बुधवार को एक बार फिर उसी इलाके में गैस रिसाव की खबर फैल गई।

इस बार तस्वीर बदली हुई थी। मौके पर सदर SDO से लेकर स्थानीय थाने के SHO तक, कई अधिकारी और कर्मचारी मौजूद थे। इंडियन ऑयल के अधिकारी भी पूरी टीम के साथ पाइपलाइन की जांच में जुटे थे। आखिर दोबारा गैस रिसाव की खबर क्यों फैली? क्या सोमवार के हादसे के बाद पूरी पाइपलाइन की सुरक्षा को लेकर कोई बड़ा खतरा सामने आया है?
4 नवंबर बुधवार को फिर से गैस रिसाव



सोमवार के हादसे के बाद बुधवार, 4 नवंबर को गोबरसही में एक बार फिर गैस रिसाव की खबर तेजी से फैलने लगी। पिछली घटना की भयावहता को देखते हुए इलाके में लोगों के बीच दहशत का माहौल बन गया।
लेकिन इस बार मौके पर प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर बड़ी तैयारी दिखाई दी। सदर SDO से लेकर स्थानीय थाने के SHO तक कई अधिकारी और कर्मचारी घटनास्थल पर मौजूद थे। इंडियन ऑयल के अधिकारी और तकनीकी टीम भी मौके पर पहुंची।

हालांकि, जांच में सामने आया कि अधिकारी पूरे इलाके की PNG पाइपलाइन की जांच कर रहे थे। यह कोई सामान्य रिसाव की घटना नहीं, बल्कि सोमवार के हादसे के बाद पाइपलाइन की सुरक्षा को लेकर चल रही व्यापक जांच थी।
IOCL अधिकारियों द्वारा पाइपलाइन की जांच
इंडियन ऑयल की टीम ने गैस वाल्व चालू कर पाइपलाइन में गैस का प्रवाह रखते हुए अलग-अलग स्थानों पर गड्ढे खोदकर जांच शुरू की। तकनीकी टीम पाइपलाइन के अलग-अलग हिस्सों की स्थिति का निरीक्षण कर रही थी, ताकि कहीं कोई क्षति, लीकेज या अन्य तकनीकी समस्या तो नहीं है, इसका पता लगाया जा सके।

सोमवार के हादसे के बाद बुधवार को जिस तरह पूरी टीम मौके पर मौजूद रही और जगह-जगह खुदाई कर जांच की गई, उससे साफ है कि पाइपलाइन की सुरक्षा अब प्रशासन और संबंधित कंपनी के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है।
अब इस पूरे मामले का सबसे अहम सवाल।
सोमवार के हादसे के बाद जब इंडियन ऑयल के अधिकारियों से पूछा गया कि क्या पथ निर्माण विभाग ने नाला निर्माण से पहले आपको इसकी सूचना दी थी, तो IOCL के अधिकारियों की ओर से बताया गया कि इसकी जानकारी जनवरी महीने में ही दी गई थी।
लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि जनवरी में दी गई सामान्य सूचना नवंबर में शुरू होने वाले निर्माण कार्य के लिए कितनी पर्याप्त थी? क्या पथ निर्माण विभाग ने यह स्पष्ट किया था कि नाले की खुदाई कब शुरू होगी? किस तारीख को होगी? किस मोहल्ले में होगी? और किस स्थान पर जेसीबी या अन्य मशीनों से खुदाई की जाएगी?
स्थानीय लोगों ने पहले ही जताया था अंदेशा
स्थानीय लोगों का दावा है कि उन्होंने पहले ही गैस पाइपलाइन को लेकर चेतावनी दी थी। इसके बावजूद हादसा हुआ। अब लोग सिर्फ नुकसान का मुआवजा नहीं, बल्कि इस पूरे मामले में जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहे हैं। क्योंकि शहर में जहां-जहां भूमिगत गैस पाइपलाइन गुजर रही है, वहां विकास और निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?
क्या निर्माण एजेंसी को पाइपलाइन की सटीक लोकेशन की जानकारी थी? क्या संबंधित कंपनी के तकनीकी कर्मियों की निगरानी में खुदाई होनी चाहिए थी? और क्या आपातकालीन स्थिति में गैस आपूर्ति बंद करने की व्यवस्था पर्याप्त थी?
बुधवार को गैस रिसाव पर त्वरित कार्रवाई
बुधवार को जिस तेजी से प्रशासनिक अधिकारी और इंडियन ऑयल की टीम मौके पर पहुंची, उसने एक और सवाल खड़ा कर दिया है। अगर सोमवार को गैस रिसाव की सूचना मिलने के समय भी इसी स्तर की तत्परता और समन्वय दिखाई देता, तो क्या इतनी बड़ी दुर्घटना को टाला जा सकता था?
फिलहाल पूरे इलाके की पाइपलाइन की जांच की जा रही है। लेकिन इस जांच के साथ-साथ सोमवार को हुई दुर्घटना की जिम्मेदारी तय करना भी उतना ही जरूरी है। जनवरी की सूचना, नवंबर में निर्माण कार्य, स्थानीय लोगों की चेतावनी और गैस रिसाव के बाद की कार्रवाई, इन सभी कड़ियों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।










