महंगी होती शिक्षा के बीच तिरहुत प्रमंडल फीस नियंत्रण समिति की मुजफ्फरपुर में बैठक

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अभिभावकों को महंगी होती स्कूल फीस से निजात का नहीं मिला कोई आश्वासन

बिहार के अभिभावकों पर संज्ञान लेते हुए तिरहुत आयुक्त की अध्यक्षता में तिरहुत प्रमंडल की फीस नियंत्रण समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में प्राइवेट स्कूलों से संबंधित विभिन्न मुद्दों जैसे किताबें, यूनिफॉर्म, ट्यूशन फीस, वार्षिक शुल्क एवं अन्य प्रभार पर गहन एवं विस्तृत चर्चा की गई।

सुमन कुमार, अध्यक्ष, इंडियन एसोसिएशन ऑफ स्कूल्स

बैठक के दौरान समिति सदस्य एवं इंडियन एसोसिएशन ऑफ स्कूल्स के अध्यक्ष सुमन कुमार ने प्राइवेट स्कूलों का पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि स्कूल प्रबंधन न तो किताबों और स्टेशनरी का उत्पादन करता है और न ही यूनिफॉर्म का निर्माण करता है। उन्होंने बताया कि पुस्तकों के मूल्य निर्धारण का आधार कागज की गुणवत्ता एवं प्रकाशकों द्वारा तय बाजार दर होती है, जबकि यूनिफॉर्म की कीमत संबंधित निर्माण कंपनियों द्वारा गुणवत्ता के आधार पर तय की जाती है। ऐसी स्थिति में स्कूल प्रबंधन के लिए मूल्य वृद्धि की सटीक सीमा निर्धारित करना व्यावहारिक नहीं है।

उन्होंने आगे कहा कि ट्यूशन फीस, मेंटेनेंस चार्ज एवं अन्य शुल्क विद्यालय द्वारा प्रदान की जा रही सुविधाओं एवं सेवाओं की गुणवत्ता पर आधारित होते हैं। जिस प्रकार अस्पताल, होटल, परिवहन एवं वस्त्र उद्योग में गुणवत्ता के अनुसार मूल्य निर्धारित होते हैं, उसी प्रकार निजी विद्यालयों में भी शुल्क संरचना सुविधाओं के अनुरूप होती है।

अभिभावकों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए यह भी सुझाव दिया गया कि वे किसी भी प्रकार की असुविधा या शिकायत के लिए सीधे विद्यालय प्रबंधन से संवाद स्थापित करें, ताकि नियमों के अंतर्गत उचित समाधान सुनिश्चित किया जा सके।

बैठक में बेतिया, मोतिहारी एवं मुजफ्फरपुर से आए अभिभावकों ने फीस निर्धारण एवं ट्रांसपोर्ट शुल्क को सरल करने की मांग रखी। इस पर आयुक्त ने स्पष्ट किया कि शुल्क का निर्धारण उपलब्ध सुविधाओं के अनुरूप ही किया जाना चाहिए तथा सरकारी नियमों के अनुसार 7% से अधिक की वृद्धि अनुमन्य नहीं है। उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि सभी संस्थानों द्वारा नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा।

ट्रांसपोर्ट शुल्क को किलोमीटर के आधार पर निर्धारित करने की मांग पर आयुक्त ने कहा कि विभिन्न प्रकार के वाहनों (जैसे सामान्य एवं एसी बस) की सुविधाओं में अंतर होने के कारण उनके शुल्क में समानता संभव नहीं है। इस दृष्टिकोण का समर्थन अभिभावक प्रतिनिधियों द्वारा भी किया गया।

आयुक्त ने स्पष्ट किया कि यदि कोई विद्यालय निर्धारित नियमों का उल्लंघन करता है, तो इसकी शिकायत की जा सकती है, और उस पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

Sandeepak Kumar
Author: Sandeepak Kumar

संदीपक कुमार, पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 साल से अधिक का अनुभव। ई टीवी से कैरियर की शुरुआत की। महुआ, कशिश न्यूज़,न्यूज 29 जैसे चैनल में बतौर पैनल प्रोड्यूसर और पीसीआर हेड के तौर पर काम किया। रायपुर आईबीसी 24, चंडीगढ़ न्यूज 18 में सीनियर प्रोड्यूसर कार्यरत रहे। कंटेंट डिजायनर के साथ ही स्क्रिप्ट राइटिंग, पैनलिंग और डिजिटल में कार्य का भी अनुभव रहा है।

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