चक्कर चौक हादसा: डॉ. शशांक पंचतत्व में विलीन; MBBS छात्र की मौत ने उठाए सड़क सुरक्षा पर सवाल

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जिस पिता ने उंगली पकड़ चलना सिखाया, उसी ने दी मुखाग्नि

मुजफ्फरपुर: चक्कर चौक पर सड़क किनारे बिखरी निर्माण सामग्री ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। सोमवार तड़के हुए दर्दनाक सड़क हादसे में MBBS छात्र शशांक कुमार की मौत हो गई। शशांक ड्यूटी के लिए अपने गन्नीपुर स्थित आवास से बाइक से निकले थे, लेकिन चक्कर चौक के पास सड़क पर फैले गिट्टी-बालू के कारण उनकी बाइक अनियंत्रित हो गई और वह गंभीर रूप से घायल हो गए।

घटना की सूचना मिलते ही डायल-112 की टीम मौके पर पहुंची और शशांक को तत्काल निजी अस्पताल ले जाया गया। हालांकि, चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम पसर गया। मंगलवार को उनकी अंत्येष्टि उनके पिता के द्वारा की गई।

सड़क पर फैले क्रशर गिट्टी, बालू प्रशासनिक व्यवस्था पर आगे बात करेंगे, लेकिन इस घटना के बाद उस पिता की परिस्थिति को समझिए कि इस घटना के बाद उस पिता पर क्या गुजर रही होगी। एक पिता अपने बच्चे के जन्म पर खुशियां मनाता है। उसका अन्नप्राशन संस्कार करता है और जब उसी पिता को उस बच्चे को मुखाग्नि देनी पड़े। आखिर क्या गुजर रही होगी उस पिता पर।

बच्चे के जन्म के साथ ही माता पिता के सपने भी उस बच्चे से जुड़ जाते हैं। पिता उसमें अपना चौरा सीना, मजबूत कंधा, और घर की हर खुशियां जो एक पिता के सपने होते हैं सब उस बच्चे के साथ जुड़ जाता है। लेकिन जवान हो चूके बेटे से जहां माता पिता के सपने पूरे होने का समय आता है, और उसी वक्त बच्चे की मृत्यु हो जाए चाहे वह जिस वजह से हो गहर में वीरानी छा जाती है। माता-पिता तो टूट कर पूरी तरह बिखर जाते हैं। शायद एक पिता के जीवन का सबसे असहनीय क्षण वह होता है, जब उसे अपने जवान बेटे को अंतिम विदाई मुखाग्नि देनी पड़ती है।

शशांक का परिवार भी शायद इसी दर्द से गुजर रहा है—एक ऐसा दर्द, जिसे शब्दों में बयान करना आसान नहीं।
एक होनहार MBBS छात्र, जो अपनी ड्यूटी के लिए घर से निकला था, अब वापस नहीं लौटेगा। पीछे रह गए हैं परिवार के सपने, अधूरी उम्मीदें और अनगिनत सवाल।
सवाल सिर्फ एक हादसे का नहीं है

सड़क पर निर्माण सामग्री, सुरक्षा इंतजामों पर सवाल
परिजनों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि चक्कर चौक पर नाला निर्माण के दौरान गिट्टी और बालू सड़क के एक हिस्से तक फैली हुई थी। आरोप है कि वहां पर्याप्त बैरिकेडिंग, रेडियम संकेतक या चेतावनी व्यवस्था नहीं की गई थी। सड़क पर निर्माण सामग्री रखी गई थी, तो वहां आने-जाने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजाम किए जाने थे। यह सवाल अब प्रशासन और संबंधित निर्माण एजेंसी के सामने है। हादसे के बाद स्थानीय लोगों में भी नाराजगी है।

सड़कों का अतिक्रमण कर उसपर निर्माण सामग्री जैसे कि बालू, गिट्टी सरिया मुजफ्फरपुर शहर में आम बात है। चाहे सरकारी निर्माण कार्य चल रहा हो या निजी पूरे शहर में यही आलम है। नगर निगम आँख बंद किए पड़ा है। न नगर आयुक्त, न मेयर या नगर परिषद को यह जानने की इक्षा है कि शहर के लोग कैसे जी रहे हैं।

मान सकते हैं कि चुने हुए लोगों को इतनी समझ आ पाए न पाए, लेकिन पढ़े लिखे अधिकारी, जैसे कि जिलाधिकारी, कमिश्नर, नगर आयुक्त सब अनपढ़ और अंधे हैं। जिन्हें इतनी भी फुर्सत नहीं है यह देखने कि शहर कैसे चल रहा है। जबकि सरकार की तरफ से इन्हें हर सुख सुविधा प्राप्त है। शहर की हर सड़क, नालियां टूटी पड़ी है और इनका निर्माण कार्य भी चल रही है, तो एक बार देख भी तो आएं कि शहरवासी कही परेशान तो नहीं हो रहे है।

बहरहाल, सड़क निर्माण और नाला निर्माण जरूरी हैं, लेकिन विकास कार्यों के दौरान आम लोगों की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है। यदि सड़क पर निर्माण सामग्री रखी जाती है, तो उचित बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेत और रिफ्लेक्टर जैसी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना बेहद महत्वपूर्ण है।

शशांक की मौत को केवल एक सड़क हादसा मानकर भूल जाना शायद उस परिवार के दर्द को और गहरा कर देगा। जरूरत है कि जिम्मेदार पक्ष पूरे मामले की जांच करें और यह सुनिश्चित करें कि निर्माण कार्यों के कारण किसी और परिवार को ऐसी त्रासदी न झेलनी पड़े।

ईश्वर दिवंगत शशांक कुमार की आत्मा को शांति दें और उनके परिवार को इस अपार दुख को सहने की शक्ति प्रदान करें।

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