बिहार में हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने को कैबिनेट का फैसला; चार शहरों में CBG प्लांट, कचरे से बनेगा स्वच्छ ईंधन

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पटना: बिहार में हरित ऊर्जा और वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में बिहार सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कैबिनेट ने गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और बिहारशरीफ में कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट स्थापित करने का फैसला लिया है। इसके लिए प्रमुख तेल एवं गैस कंपनियों को 25 वर्षों के लिए 10-10 एकड़ जमीन मुफ्त उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। पश्चिम चंपारण के कुमारबाग में भी CBG प्लांट की मंजूरी दी गई है।

इस पहल में इंडियन ऑयल (IOCL), गेल (GAIL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) जैसी प्रमुख कंपनियों की भागीदारी प्रस्तावित है। इसका उद्देश्य कृषि अवशेष, गोबर और जैविक कचरे को उपयोगी ऊर्जा में बदलना और राज्य में स्वच्छ ईंधन के विकल्प को मजबूत करना है।

कचरे से तैयार होगी ऊर्जा
CBG प्लांट में गोबर, पराली, कृषि अवशेष, गन्ने की प्रेस-मड और अन्य जैविक कचरे का इस्तेमाल किया जा सकता है। इन सामग्रियों को ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में विशेष प्रक्रिया से विघटित किया जाता है, जिससे बायोगैस तैयार होती है।

इसके बाद गैस से कार्बन डाइऑक्साइड, नमी और अन्य अशुद्धियों को हटाकर मीथेन की मात्रा बढ़ाई जाती है। शुद्ध गैस को कंप्रेस करके Compressed Biogas यानी CBG तैयार की जाती है, जिसका इस्तेमाल वाहनों में CNG के विकल्प के रूप में किया जा सकता है।

बिहार के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह परियोजना?

गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, बिहारशरीफ और कुमारबाग में CBG परियोजनाएं आगे बढ़ती हैं तो बिहार में कचरे से ऊर्जा, स्वच्छ ईंधन और स्थानीय रोजगार के क्षेत्र में नई संभावनाएं बन सकती हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि इन परियोजनाओं के लिए पर्याप्त कृषि अवशेष और जैविक कचरा लगातार उपलब्ध हो, प्लांट निर्धारित मानकों के अनुसार संचालित हों और उत्पादित CBG के लिए प्रभावी बाजार एवं आपूर्ति व्यवस्था विकसित हो।

किसान और स्थानीय अर्थव्यवस्था को फायदा
CBG परियोजनाओं का एक महत्वपूर्ण पहलू कृषि अवशेषों का बेहतर उपयोग है। पराली और जैविक कचरे के प्रबंधन से खुले में कचरा जलाने की समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है।

इसके साथ ही प्लांट के आसपास कच्चे माल की आपूर्ति, परिवहन, संचालन और रखरखाव से जुड़े स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। बायोगैस उत्पादन के बाद बची जैविक सामग्री का उपयोग जैविक खाद के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।

CBG क्यों बन रहा ऊर्जा का नया विकल्प?

बढ़ती ऊर्जा जरूरतों के बीच CBG को वैकल्पिक और स्वच्छ ईंधन के तौर पर देखा जा रहा है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ जैविक कचरे का प्रबंधन भी संभव है।

अगर स्थानीय स्तर पर पर्याप्त मात्रा में कृषि अवशेष और जैविक कचरा उपलब्ध हो, तो ऐसे प्लांट ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कचरा प्रबंधन और वैकल्पिक ऊर्जा, तीनों क्षेत्रों में उपयोगी साबित हो सकते हैं।

प्लांट लगाने के लिए जरूरी निर्देश?

किसी CBG परियोजना की स्थापना से पहले कच्चे माल की नियमित उपलब्धता, उपयुक्त भूमि, पानी और बिजली जैसी आधारभूत सुविधाओं का आकलन किया जाता है। इसके बाद पर्यावरणीय और स्थानीय प्रशासनिक अनुमतियों सहित आवश्यक वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं।

परियोजना के आकार और तकनीक के अनुसार डाइजेस्टर, गैस शुद्धिकरण प्रणाली, कंप्रेसर और स्टोरेज जैसी सुविधाएं स्थापित की जाती हैं।

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