SIR के विवादों के बीच बंगाल चुनाव में बीजेपी ने मारी बाजी: 207 सीटों के साथ सरकार बनाने की कवायद तेज
बंगाल चुनाव खत्म हो चुका है। बीजेपी 207 सीटें जीत पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने के प्रयासों में जुटी हैं। वहीं ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी 80 सीटो के साथ सरकार से बाहर हो चुकी हैं। लेकिन जिस तरीके उन्होंने ऐलान किया है कि वो मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा नहीं देंगी। अब पश्चिम बंगाल में एक नया संवैधानिक संकट खड़ा होता दिख रहा है।
साल 2006 के चुनाव से अपनी जमीन तलाश रहे ममता बनर्जी को सिंगुर टाटा प्लांट ने बैठे बिठाए एक मुद्दा दे दिया। इसी आंदोलन ने ममता को पश्चिम बंगाल का सिंहासन दिला दिया। 2011 के चुनाव में बंगाल से कम्युनिस्ट सरकार खत्म हो गई और टीएमसी का शासन ममता बनर्जी के नेतृत्व में शुरू हुआ। इस चुनाव में टीएमसी को 184 सीटें मिली। इसके बाद ममता 2016 और 2021 का विधानसभा चुनाव में भी बाजी मार बंगाल के सत्ता पर काबिज रहीं।
बंगाल जीतने की जुगत में बीजेपी भी बंगाल में अपना जनाधार बढ़ाने की कोशिश कर रही थी। बीजेपी 2016 के बंगाल चुनाव में 3 सीटें जीती। लेकिन इसी बीच ममता की राइट हैंड कहे जाने वाले शुभेंदु अधिकारी से अभिषेक बनर्जी के बढ़ते प्रभाव को मुख्य कारण मतभेद शुरू हुआ, और साल 2020 में अधिकारी ने बीजेपी ज्वाइन किया। इसका असर यह हुआ कि 2021 के चुनाव में बीजेपी 77 सीटों पर पहुंच गई। लेकिन सत्ता ममता के हाथों में ही रहा। तृणमूल कांग्रेस 213 सीटों के साथ पश्चिम बंगाल की सत्ता पर काबिज रही।
ममता और केंद्र सरकार का हमेशा ही छत्तीस का आंकड़ा रहा। केंद्र सरकार का कोई नियम वह बंगाल में नहीं लागू होने देती। चाहे वह किसानों का सम्मान निधि का मामला हो या आयुष्मान कार्ड या NIC या UCC का। सबमें सबसे पहले खिलाफत ममता बनर्जी का ही होता था। इसी बीच निर्वाचन आयोग ने SIR मतदाता पुनर्निरीक्षण कार्य शुरू हुआ। ममता इसके भी खिलाफ गई। क्यूं कि SIR राष्ट्रपति के राजपत्र से अधिसूचित किया गया था इसलिए ममता इसका विरोध बहुत अधिक समय तक नहीं कर सकती थी। दिसंबर 2025 से SIR का कार्य प्रारंभ हुआ।
इस प्रक्रिया के तहत 91 लाख मतदाताओं के नाम बंगाल से कट गए। जिसमें 53 लाख को बंगाल सरकार ने जेनुइन बताया। वहीं 27 लाख मतदाताओं पर मामला फंस गया। जिसमें ममता की चुनाव आयोग से अदावत शुरू हो गई जो अंततः सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई। सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा शिकायत ट्रिब्यूनल बना कर कहा गया कि जिनके नाम कटे हैं वो इस संस्था में अपनी आपत्ति दर्ज करवा सकता है। इसके तहत 34 लाख से ज्यादा आपत्तियां दर्ज की गई जिसमें जांचोपरांत 1607 नाम दूसरे चरण के चुनाव से पहले जोड़े गए।
2026 के चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बांग्लादेशी और धर्मविशेष को टीएमसी द्वारा तुष्टिकरण की नीति के तहत बढ़ावा देना ही था। जिस पर बीजेपी ने जमकर हल्ला बोला। इसका परिणाम यह हुआ कि बीजेपी 207 सीटें जीत बंगाल की सत्ता पर काबिज हो गई। इस चुनाव में ममता बनर्जी लगातार दूसरी बार हारी। और इस बार सत्ता भी छीन गई। अब आने वाले दिनों में बंगाल का शासन और ममता की रणनीति क्या करवट लेती है वह पता चलेगा। तब तक बंगाल में नेताओं की बातों का मजा लीजिए।










