बिहार और उत्तर बंगाल को जोड़ने वाली विक्रमशिला पुल का पाया नंबर 133-134 के बीच का 34 मीटर का स्पाइन 3-4 मई की दरमियानी रात भड़भड़ाकर गिर गया। यह पुल NH-80 और NH-31 को जोड़ता है और इस क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण और व्यस्त वाणिज्यिक यातायात मार्ग है। पुल के ध्वस्त होने के बाद पुल निर्माण विभाग के Executive Engineer को निलंबित कर दिया गया है।

विक्रमशिला सेतु भारत के गिने चुने पानी के ऊपर बने बड़े पुलों में गिना जाता है। यह पुल बिहार को उत्तर बंगाल से जोड़ता है। NH 80 और NH 31 को जोड़ने वाला यह पुल बिहार और बंगाल के 17 जिलों का लाइफलाइन कहा जाता है। भागलपुर के नजदीकी 6-7 जिलों के लोगों की सांसे उखड़ती है, तो वो भागलपुर के चिकित्सकों का रुख करते हैं। वाणिज्यिक जरूरतों के लिए भी लोगों की भागलपुर के ऊपर ही निर्भरता है।

इस पुल की आधारशिला 1990 में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के द्वारा रखी गई थी। 11 सालों के बाद 2001 में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के द्वारा उद्घाटन कर यातायात चालू किया गया था। जो बस 25 साल ही चल पाया, और पाया नंबर 133-134 के बीच का स्पाइन धराशाई हो गया। जिसके परिणामस्वरूप पुल का 34 मीटर का हिस्सा गंगा नदी में समा गया। अब यह पुल दो हिस्सों में बंटा नजर आता है। नवगछिया वालों को भागलपुर आने के लिए अब या तो नाव के सहारे गंगा पार करना या वाया मुंगेर होते हुए सड़क मार्ग से भागलपुर पहुंचना पर रहा है। 4700 मीटर लंबा यह पुल सिर्फ दो राजमार्गो को ही नहीं जोड़ती थी बल्कि यह भागलपुर से नवगछिया के बीच 17 जिलों के भी आवागमन और वाणिज्य के साथ घर से घर को भी जोड़ती थी।

इसी साल मार्च के महीने में पुल का मरम्मत का कार्य भी किया गया था। भागलपुर के अमर कुमार कहते हैं कि स्थानीय लोगों ने प्रशासन को इस बात की शिकायत की थी कि पुल कमजोर हो रहा है। इन दोनों पायों के बीच पुल का एक सिरा लगभग 4 इंच ऊपर उठ गया था। लेकिन जिला प्रशासन ने उनकी बातों को अनसुना कर दिया। जिसकी परिणति पुल के दो भागों में बंटने में दिखी। लेकिन केवल Executive Engineer को सस्पेंड कर भागलपुर जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी ने अपनी जवाबदेही से मुंह मोड़ लिया।

हालांकि गंगा नदी में प्रशासन के द्वारा नाव की व्यवस्था जरूर की गई है। लेकिन यह नाव भी सुबह 5 से शाम के 5 बजे के बीच चलाई जा रही है। लेकिन यह नकाफी साबित हो रहा है। ऊपर से नाव पर ओवरलोडिंग का खतरा भी है। विक्रमशिला पुल से लाखों लोग यात्रा करते थे। लेकिन नाव से ऐसा होना संभव संभव नहीं हो पा रहा है। और 5 बजे के बाद नाव न चलने से लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

इसी बीच बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को जैसे ही पुल के धराशाई होने की खबर मिली, त्वरित स्तर पर उन्होंने कार्यवाही शुरू कर दी। मुख्यमंत्री ने तत्काल पटना आईआईटी और भारत सरकार के रक्षा मंत्री से संपर्क कर सेना के पुल निर्माण करने वाले दल को पुल की स्थिति जांचने का आग्रह किया। जिसके बाद पटना आईआईटी और सेना के पुल निर्माण के दल ने क्षतिग्रस्त पुल का निरीक्षण कर पुल की मरम्मती पर कुल 36 करोड़ का खर्च बताया है। अब देखना यह है कि पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से का निर्माण कब तक शुरू होता है और भागलपुर सहित आसपास के जिलों को सांस की आस कब तक पूरी होती है।










