साल 2012 में भी CBSE ऑनलाइन OSM मूल्यांकन में हुआ था फेल
तेलंगाना में इसके खिलाफ साल 2019 में विपक्षी दलों ने किया था आंदोलन
साल 2026 के 12th की परीक्षा को CBSE बोर्ड और सरकार ने अब एक्सपेरिमेंट का हिस्सा बना दिया है। जिस कारण छात्र इस कदर परेशान हैं कि शिक्षण व्यवस्था से छात्रों का विश्वास उठा गया है। जिस प्रक्रिया से छात्रों को अंक और किसी की कॉपी किसी भी छात्र को मुहैया कराई जा रही है, इससे छात्रों में बोर्ड के प्रति असंतोष बढ़ा है। सरकार का कहना है कि अगले साल 2027 से 10th की भी कॉपियों की जांच OSM से ऑनलाइन मूल्यांकन होगा

जिस परीक्षा से छात्रों के भविष्य का दरवाजा खुलता है, वही पर छात्रों के भविष्य के साथ सरकार और बोर्ड ने भद्दा मजाक किया है। आखिर सीबीएसई की जब तैयारी ही पूरी नहीं थी तो ऑनलाइन कॉपी की जांच कैसे करवाई गई। जिसने कॉपी जांचने का टेंडर लिया उसे कितना पता था कि बड़े स्तर पर कॉपी की जांच ऑफलाइन या मैनुअल तरीके से कैसे की जाती है।
सीबीएसई (CBSE) 12वीं के परिणाम और ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (OSM) के लिए टेंडर हैदराबाद स्थित कंपनी Coempt EduTeck Pvt Ltd को दिया गया था। जबकि इस प्रक्रिया के लिए टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने भी निविदा डाली थी, लेकिन मुहर Coempt EduTeck Pvt Ltd के नाम पर लगी। वैसे इस कंपनी का परीक्षा के कॉपियों के मूल्यांकन का कार्यक्षेत्र सूक्ष्म रहा है। लेकिन जैसे ही 20 लाख से ज्यादा परीक्षाओं के कॉपी के मूल्यांकन करने की बारी आई, इसने छात्रों के भविष्य को दांव पर लगा दिया।
Scaning में हुई लापरवाही
अब छात्रों के कम नंबर दिए जाने के आरोपों के बीच छात्रों को आंसर शीट की स्कैन कॉपी मुहैया कराई गई तो उसमें भी त्रुटियां पाई गई हैं। बदला हुआ आंसर शीट परीक्षार्थी को मुहैया करवाए गए तो किसी को इतनी धुंधली तस्वीर भेजी गई जो पढ़ना भी मुश्किल है। नंबर देने में जो झोल किया गया है वह अलग ही है इन सब के पीछे का एक मात्र कारण एजेंसी अपने कार्य के प्रति मुस्तैद नहीं था। स्कैन तक में गड़बड़ियां सामने आ रही है, वही शिक्षकों की ट्रेनिंग पर भी ध्यान नहीं दिया गया और न ही उन्हें ट्रेन्ड किया गया। ऊपर से किसी भी Examiner को इस व्यवस्था पर शिकायत नहीं करने तक की हिदायत दी गई थी, जो छात्रों के हंगामे के बाद बात निकल कर आई।
शिक्षकों के ट्रेनिंग की व्यवस्था नहीं

डॉ. प्रमोद कुमार, शिक्षक सह CBSE टेलीकाउंसलर ने बताया कि इसके पहले भी 2012 में कॉपियों को जांचने की ऐसी ही ऑनलाइन exercise की गई थी जो कि एक failure प्रयास था। उसमें भी जिस एजेंसी को यह कार्य दिया गया था, उसमें भी त्रुटियां पाई गई थी। इस बार 2026 में भी ऑनलाइन OSM के माध्यम से कॉपियों का मूल्यांकन हुआ, उसमें भी त्रुटियां रह गई। शिक्षकों को प्रॉपर ट्रेनिंग तक नहीं दी गई। अगर किसी शिक्षक ने कॉपियों को रिजेक्ट किया तो वह आंसर शीट किसने जांची इसका कोई रिकॉर्ड CBSE के पास नहीं है।
कॉपी के परीक्षण में अनियमितता
किसी शिक्षक ने कंप्लीशन रिपोर्ट जमा कर दिया और वो अगर छुट्टी पर चला गया। लेकिन इसी बीच उस शिक्षक को 1 या 2 सेट और कॉपी जांचने को दी गई और उसे इस बात की जानकारी नहीं है। इस परिस्थिति में भी किसी दूसरे टीचर को कॉपियां अलॉट की गई जिन्हें उस सेट की कॉपियों को जांचने का ट्रेनिंग नहीं दिया गया तो समझा जा सकता है कि उन शिक्षक ने कैसे कॉपियों की जांच की होगी। यहां भी संभावना बन सकती है कि अंकों के साथ खिलवाड़ किया गया होगा। अनाप शनाप नंबर डाले होंगे उन शिक्षक महोदय ने।
Revaluatiin fee में कमी
यहां एक और बात प्रमोद कुमार ने बताई कि छात्रों के हैंगामे के बाद CBSE ने कॉपियों के Revaluation की फीस को 700 रुपये से घटाकर 100 रुपए कर दिया। जिसके बाद Revaluation कराने वाले छात्रों की संख्या पहले की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत के आसपास बढ़ गए जिसमें बड़े शहरों के छात्रों की संख्या सबसे ज्यादा है। ऐसे में CBSE के लिए भी बहुत मुश्किल हो चुका है कि जिस सीरियल नंबर में छात्रों की कॉपियों खोजी जा रही है उसमें किसी अन्य क्षेत्र की कॉपी मिल रही है। तो आखिर छात्रों को अपनी आंसर शीट कैसे मिल पाएगी।
2027 में 10वीं भी Online परीक्षण की संभावना
इसी बीच हमारे महान मंदबुद्धि जनता ने सबसे पहले जिस छात्र वेदान्त ने कॉपियों में गड़बड़ी की बात उठाई थी उसे पाकिस्तान का जासूस तक बता दिया। मतलब क्या बुद्धिमानी है भाई साहब अगर किसी गरीब के बच्चे के पेट में दर्द हो है तो गांव कहने लगते हैं कि आज उसने ज्यादा खा लिया है। उस वेदांत की परेशानी तो समझते जिसने अपनी पढ़ाई के लिये अपना सब कुछ छोड़बेक सुंदर भविष्य के लिए उसने सिर्फ पढ़ाई करी। इसलिए जो मार्क्स उसने पाए उसमें वो संतुष्ट नहीं था जिसके वजह से उसने अपने Answer Sheet की मांग की जिसके बाद CBSE, सरकार और OSM मूल्यांकन करने वाले एजेंसी का काला चिट्ठा निकल कर सामने आया। वैसे अब देखना यह है कि सरकार और CBSE का क्या रुख होता है जिसमें कहा गया है कि 10वीं और 12 वीं की कॉपियां अगले साल से इसी तरह से Online चेकिंग होगी।
2019 में तेलंगाना में विपक्ष का ऐतराज
यहां एक और बात बताते चलें कि 2019 में तेलंगाना में इस प्रक्रिया को लेकर पूरे विपक्ष ने इसका विरोध भी किया था। कोएम्प्ट के पूर्ववर्ती अवतार ‘ग्लोबरेना टेक्नोलॉजीज’ (Globarena Technologies) को जब तेलंगाना इंटरमीडिएट परीक्षा के मूल्यांकन का ठेका मिला था, तब विपक्ष ने आरोप लगाया था कि कंपनी को यह काम राज्य के तत्कालीन शीर्ष राजनीतिक नेताओं की नजदीकियों के कारण मिला है।










