बम को निष्क्रिय करने को लेकर सेना के अधिकारियों ने किया स्थल का निरीक्षण

उमेश कांत गिरि. घाटशिला संवाददाता. झारखंड
झारखंड से लगातार मिल रहे घातक बम से अमेरिका ईरान की लड़ाई के बीच अब ये सवाल भी उठ रहा है कि क्या भारत भी कभी किसी देश का युद्धबेस हुआ करता था। ब्रिटिश शासन के अधीन झारखंड का पूर्वी सिंहभूम जिला द्वितीय विश्वयुद्ध के समय अमेरिका का युद्ध अड्डा बना था। जहां से लगातार अमेरिकी बम मिलने से सनसनी फैल गई है।

पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला अनुमंडल के बहरागोड़ा थाना क्षेत्र स्थित पानीपड़ा-नागुड़साई स्थित स्वर्णरखा नदी के तट पर दूसरी 227 किलोग्राम वजनी बम मिला है। इस विशालकाय बम के कारण इलाके में फिर से दहशत का माहौल बना दिया है। बम की सूचना पर भारतीय सेना की विशेष टीम मौके पर पहुंची और बम का निरीक्षण कर स्थिति का आकलन किया। सेना की टीम ने प्रारंभिक जांच के बाद पूरे मामले की रिपोर्ट संबंधित विभाग को भेजने की बात कही है। रिपोर्ट के आधार पर ही बम को निष्क्रिय करने की अंतिम प्रक्रिया शुरू की जाएगी। हालांकि, विस्फोट कब किया जाएगा, इसे लेकर अभी तक कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई है।

इसके पहले 17 मार्च को भी इसी क्षेत्र में मिले दो बम को बहरागोड़ा पुलिस की पहल पर सेना की लगभग 25 सदस्यीय विशेषज्ञ टीम द्वारा इसी क्षेत्र में 10 दिनों से रहकर सफलतापूर्वक डिफ्यूज किया गया था। उस दौरान सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए लगभग 20 स्क्वायर फीट घन के दो गड्ढे खोदे गए थे। बम को बालू से भरे बोरों से ढककर सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय किया गया था। और आसपास रहने वाले लोगों को सुरक्षा के मद्देनजर 1 किलोमीटर एरिया से दूर भेज दिया गया था। विस्फोट के बाद धरती के ऊपर लगभग 4 फीट तक चिंगारी उठी थी। और लगभग 30 फीट ऊपर तक बालू उछला था।

सेना के अधिकारियों के द्वारा बम की पूरी स्थिति का मुआयना किया गया है। बम को निष्क्रिय करने की प्रक्रिया पर भी सेना के अधिकारियों द्वारा मंथन किया जा रहा है। सेना ने आसपास के गांव में लोगों को एहतियात बरतने के साथ-साथ अफवाह और भय से भी बचने को कहा है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर लोगों को घटनास्थल से दूर रहने की अपील करते हुए सुरक्षा बलों की निगरानी बढ़ा दी गई है।










