4 जून की घटना के बाद ब्रह्मपुरा के प्रसाद हॉस्पिटल का निबंधन/पंजीकरण तत्काल प्रभाव से रद्द (निलंबित) कर दिया गया है। असैनिक शल्य चिकित्सक सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर द्वारा यह कार्यवाही किया गया है।
04 जून की सुबह मुजफ्फरपुर की आँख प्रसाद हॉस्पिटल में हुई घटना के साथ खुली, जहां सुबह लगभग साढ़े 3 बजे प्रसाद हॉस्पीटल, ब्रह्मपुरा, मुजफ्फरपुर में आग लगने की घटना घटित हुयी जिसके कारण 6 मरीजों की मृत्यु हो गई तथा अनेक मरीज गंभीर रूप से घायल हो गए। यह घटना इतनी भयावह थी कि पूरा उत्तर बिहार इस घटना से दहल गया। इसके बाद असैनिक शल्य चिकित्सक सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर द्वारा इस घटना को अत्यंत चिंताजनक एवं गंभीर मामला माना है। इसके बाद कार्यवाही करते हुए इस अस्पताल का निबंधन/पंजीकरण तत्काल प्रभाव से रद्द (निलंबित) कर दिया गया है।
मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुरा स्थित प्रसाद हॉस्पिटल में सुबह 3:30 बजे आग लगने की सूचना मिली इसके बाद तुरंत कार्रवाई करते हुए अग्नि शमन दल के कर्मियों ने 4:15 बजे पहुंचकर आग बुझाने की कार्रवाई शुरू की। सुबह 3:55 पर अग्नि शमनको सूचना मिली थी कि प्रसाद हॉस्पिटल में आग लग गई है जिसके बाद यह लगभग 4:15 बजे पहुंचे और उन्होंने आग बुझाने की कार्रवाई शुरू की इस हादसे में 6 लोगों की जान चली गई है कुछ लोग घायल हैं जिनका इलाज मुजफ्फरपुर के अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है और कुछ को पटना भी रेफर किया गया है। वैसे एक बार तो मरनेवालों का आंकड़ा 25 तक जा चुका था। लेकिन बीतते समय के साथ यह आंकड़ा 5 पर जा कर रुका लेकिन शाम को एक और कैजुअल्टी की खबर आई जिसके बाद यह संख्या 6 हो गई।
आग कैसे लगी इसके बारे में पूरी छानबीन चल रही है लेकिन प्रत्यक्ष दर्शियों ने बताया कि ऑक्सीजन सिलेंडर में सबसे पहले चिंगारी उठी और बहुत जल्द थोड़े समय में ही आग ने विकराल रूप ले लिया क्योंकि आईसीयू में काफी सारे उपकरण रखे थे। उस उपकरणों में आग पकड़ना शुरू किया और इसने पूरे आईसीयू और सीसीयू वार्ड को अपनी चपेट में ले लिया। प्रसाद हॉस्पिटल में जिस वक्त आग लगी उस समय इन दोनों वार्डो में लगभग 27 लोग भर्ती थे जिसे प्रसाद हॉस्पिटल के प्रबंधन ने खुद कंफर्म किया है।
अस्पताल प्रबंधन ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए इस घटना को बहुत ही दुखद बताया साथ ही उसने यह बात भी कही है कि प्रशासन के द्वारा जो भी छानबीन की जाएगी उसमें प्रसाद अस्पताल प्रबंधन पूर्ण सहयोग करेगा। प्रबंधन ने कहा की जिला प्रशासन ने जो भी अस्पताल से संबंधित डाक्यूमेंट मांगे वह सारे वैध प्रमाण पत्र जिला प्रशासन को उपलब्ध करा दिया गया। अब यहां एक पेंच फस रहा है, क्या अस्पताल में फायर सेफ्टी काम कर रहा था। जवाब है नहीं, सूत्रों के हवाले से जो सूचना दी गई उसके अनुसार फायर सिस्टम का पाइप ही फूटा हुआ था। और दूसरा इनके आईसीयू और सीसीयू में फायर सेफ्टी का पाइप का कनेक्शन ही नहीं था और न ही फ़ायर शेफ्टी का अनुभव रखने वाला कोई कर्मचारी तब उपस्थित था। केवल प्रमाण पत्र लेने भर से जिम्मेदारी खत्म हो गई। अगर समय रहते अस्पताल का फायर शेफ्टी चालू कर दिया जाता तो कैजुअल्टी भी कम होती। और जिस तरह से आईसीयू और सीसीयू को नुकसान भी कम होता।
अब सबसे महत्वपूर्ण बात। जब भी कही आग लगती है तो सबसे पहले लोग इमरजेंसी गेट की तरफ भागते हैं। लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हमेशा तो अस्पताल का रुख नहीं करना पड़ता है इसलिए पता ही नहीं था कि भागना किधर से है और न ही अस्पताल का कोई कर्मचारी यह बताने के लिए था। और आईसीयू और सीसीयू दोनों पांचवीं मंजिल पर है तो वहां से मरीज को लेकर भागने के क्रम में ही मरीजों की झुलसने से जान चली गई थी।
प्रसाद हॉस्पिटल में गुरुवार को जैसी घटना घटी, अगर वैसी घटना मुजफ्फरपुर के किसी अन्य अस्पताल यह तक की तिरहुत क्षेत्र के एक मात्र मेडिकल कॉलेज SKMCH में घटी तो वहाँ भी कैजुअल्टी की पूरी संभावना हो सकती है क्यों कि इस अस्पताल का भी फायर अलार्म सिस्टम से लेकर फायर शेफ्टी तक कोई भी उपकरण काम नहीं करता। इस एक घटना के बाद प्रशासन को शहर के सारे अस्पतालों की चेकिंग करनी चाहिए की कौन से अस्पताल में क्या-क्या कमी है और उसे जल्द से जल्द दुरुस्त कराने का भी प्रयास होना चाहिए ताकि आगे चलकर भविष्य में ऐसी घटना दुबारा न घटे










