मुजफ्फरपुर में ‘दिल विदाउट बिल’ की बड़ी पहल: 11 ब्लॉकों के हृदय रोग से ग्रसित मासूमों पहुंचे पटना, मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना के तहत अहमदाबाद के विशेषज्ञ डॉक्टर करेंगे इलाज

मुजफ्फरपुर जिले के उन गरीब परिवारों के लिए शनिवार का दिन खुशियों की नई सौगात लेकर आया, जिनके बच्चे जन्मजात हृदय रोग (दिल में छेद) जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के तहत मुजफ्फरपुर के 11 अलग-अलग प्रखंडों से चिन्हित 25 बच्चों को बेहतर इलाज और विस्तृत जांच के लिए इंदिरा गांधी इंस्टिट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी (IGIC), पीएमसीएच पटना भेजा गया। ‘दिल विदाउट बिल’ के संकल्प के साथ स्वास्थ्य विभाग की यह मुहिम उन परिवारों के लिए सहारा बनी है, जो महंगे इलाज का खर्च उठाने में असमर्थ थे।
आरबीएसके टीम और कर्मियों के सामूहिक प्रयास से मिली सफलता:
इस बड़े मिशन को धरातल पर उतारने में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) की टीम, स्वास्थ्य विभाग के सभी पदाधिकारियों और कर्मियों का विशेष योगदान रहा है। डीपीएम रेहान अशरफ ने कहा स्वास्थ्य कर्मियों की दिन-रात की मेहनत और स्क्रीनिंग प्रक्रिया के कारण ही इतने कम समय में 11 ब्लॉकों से इन बच्चों को चिन्हित कर सरकारी लाभ पहुँचाना संभव हो पाया है। अधिकारियों ने बताया कि इन बच्चों की जांच श्री सत्य साईं हृदय अस्पताल, अहमदाबाद से आए विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम द्वारा पटना स्थित आईजीआईसी कैंप में की जा रही है। जांच के बाद जिन बच्चों को सर्जरी की जरूरत होगी, उन्हें निशुल्क ऑपरेशन की सुविधा मिलेगी।

11 प्रखंडों के बच्चों को सुरक्षित पहुँचाया गया पटना:
शनिवार की सुबह मुजफ्फरपुर के विभिन्न प्रखंडों से आए इन 25 मासूमों और उनके परिजनों को स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से सुरक्षित तरीके से पटना रवाना किया गया। इस दौरान आरबीएसके टीम के सदस्यों ने बच्चों और उनके अभिभावकों का हौसला बढ़ाया। परिजनों ने बताया कि प्राइवेट अस्पतालों में हृदय रोग के इलाज का खर्च लाखों में बताया गया था, लेकिन आरबीएसके और सरकारी कर्मियों के सक्रिय प्रयास से अब उनके बच्चों को नया जीवन मिल सकेगा।

स्वस्थ बचपन की ओर बढ़ते कदम:
मुजफ्फरपुर स्वास्थ्य विभाग का यह प्रयास जिले में एक स्वस्थ भविष्य की नींव रख रहा है। ‘दिल विदाउट बिल’ अभियान के तहत अब तक अनेक बच्चों को जानलेवा बीमारियों से मुक्त कराया जा चुका है। आरबीएसके डीसी प्रशांत कुमार का कहना है कि विभाग की प्राथमिकता है कि कोई भी बच्चा संसाधनों की कमी के कारण इलाज से वंचित न रहे। इसी उद्देश्य के साथ स्वास्थ्य विभाग और आरबीएसके के कर्मी लगातार ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर बीमार बच्चों की पहचान कर उन्हें इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ दिला रहे हैं।










