मुजफ्फरपुर में लोक कला, लोक संस्कृति और सांस्कृतिक विरासत को समर्पित “लोक उत्सव 2026” का भव्य समापन बिहार बाल भवन किलकारी में हुआ। संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से आयोजित इस उत्सव में लोक गीत, लोक नृत्य, नाटक और संगोष्ठी के माध्यम से बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया।

अभिनन्दन मुजफ्फरपुर द्वारा आयोजित लोक उत्सव 2026 का समापन समारोह शनिवार को बिहार बाल भवन किलकारी में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य लोक कला, लोक संस्कृति और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन को बढ़ावा देना था।”लोक उत्सव जीवन दर्शन का जीवंत दस्तावेज है। हमारी लोक परंपराएं समाज की पहचान हैं और इनके संरक्षण के लिए ऐसे आयोजनों की आवश्यकता है।”
समारोह के दौरान आयोजित संगोष्ठी में विभिन्न लोक कलाओं और सांस्कृतिक परंपराओं पर विस्तार से चर्चा की गई। लोक रत्न भिखारी ठाकुर के जीवन और योगदान को भी याद किया गया। कार्यक्रम में डोमकच, जट-जट्टिन, झूमर, सोहर, सामा-चकवा और लीची गीत सहित कई क्षेत्रीय लोक गीतों और नृत्यों की आकर्षक प्रस्तुतियां दी गईं।

इस अवसर पर वरिष्ठ कलाकारों को अंगवस्त्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। स्वर्णिम कला केन्द्र की संस्थापिका उषा किरण श्रीवास्तव को “लोक रत्न सम्मान 2026” से सम्मानित किया गया। वहीं स्वर्णिम कला केन्द्र के कलाकारों ने झिझिया, कजरी और झूमर लोक नृत्य एवं गीतों की मनमोहक प्रस्तुति देकर दर्शकों का दिल जीत लिया।
कार्यक्रम में सुनील कुमार के निर्देशन में “दोस्ती” नाटक का मंचन भी किया गया। नाटक के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति मित्रवत दृष्टिकोण अपनाने का संदेश दिया गया। कलाकारों ने अपने प्रभावशाली अभिनय से दर्शकों को जागरूक करने का प्रयास किया।

बिहार बाल भवन किलकारी के बच्चों ने भी पर्यावरण विषय पर भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुत कर सभी का ध्यान आकर्षित किया। बच्चों की प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब सराहा और तालियों से उनका उत्साहवर्धन किया।
समापन समारोह में संस्थान के अध्यक्ष प्रफुल्ल चंद्र मिश्रा सहित अनेक कलाकार, शिक्षाविद, सांस्कृतिक कार्यकर्ता और गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन अनिल कुमार ठाकुर ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन अभिनन्दन संस्थान के सचिव प्रभात कुमार ने किया।
लोक कला और संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में लोक उत्सव 2026 एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन का संदेश देते हुए यह आयोजन यादगार बन गया।










