
बिहार सरकार के कर्मचारियों की गलती का खामियाजा मुजफ्फरपुर या बिहार वासी उठा रहे हैं। RTO हर दिन सैकड़ों ऐसे चालान काटता है जिसमें गाड़ी घर पर लगी होती है। लेकिन चालान मोबाइल के मैसेज बॉक्स में गिरता है। कहा ये जाता है कि आपकी बाइक फैलाने लाइट को जंप कर गई है या आपने हेलमेट नहीं पहना था, तो अब आप 1000 का चालान भरिए।

अजीब बानगी है इस RTO (क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय) की। ताजा मामला गोबरसही के सौरभ कुमार के साथ फिर से हो गया है। इसके पहले भी इसी साल जनवरी के महीने में RTO ने एक बार इनके साथ धोखाधड़ी कर दी है। जिसका निपटारा आज तक नहीं हुआ है। सौरभ कुमार के मुताबिक वो शिक्षक हैं और गाय घाट में तत्काल पदस्थापित हैं। और मतगणना कार्य में लगे हैं।
ये हर कार्य दिवस को अपनी बाइक BR06AQ9211 से ही अपने कार्यस्थल आते जाते हैं। सौरभ के अनुसार 6 मई 2026 को जिस जगह चालान कटा है, उस तारीख को और उस समय पर वो अपने मतगणना कार्य में लगे कार्यस्थल पर थे। चालान में जिस गाड़ी के चालक पर हेलमेट न पहनने के लिए चालान धारित किया गया है, वह गाड़ी और सौरभ दोनों नहीं है। गाड़ी और चालक कोई और ही है।
गौरतलब है कि इसके पहले जब चालान काटा तो पीड़ित सौरभ ने गाड़ी का नंबर प्लेट डिजिटल करा लिया। 6 मई के चालान में जो गाड़ी फोटो के माध्यम से दर्शायी गई है वो गाड़ी उनकी नहीं है, लेकिन नंबर उनकी गाड़ी का दिख रहा है। इस परिस्थिति के कारण शिक्षक सौरभ कुमार और परेशान हैं कि उनके गाड़ी का नंबर का इस्तेमाल किसी और गाड़ी पर लगा कर किया जा रहा है। उन्होंने अपने आवेदन में इसको लेकर लिखा है कि अगर कोई अनहोनी होती है तो इसका सारा दोष उनके ऊपर आएगा। इसके कारण वो और दहशत में हैं।
ऐसी ही कई और पीड़ित हैं जिनके साथ सरकारी विभाग धोखाधड़ी कर रहा है। पहले भी खबर जिन्दगी न्यूज पर इस तरह की खबर 21 जनवरी को प्रकाशित की गई है। कईयों ने शिकायत तक दर्ज कराई है लेकिन आज तक इन शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं हो पाया है। विभाग के द्वारा धोखाधड़ी के शिकार लोग जिलों में RTO (Regional Transport Office) का चक्कर काट रहे हैं,लेकिन सुनवाई के नाम पर कोर्ट की तारीख पर तारीख का खेल चल रहा है।










